भारत में बैंकिंग क्षेत्र

 

भारतीय रिजर्व बैंक

;(Reserve Bank of India)

हिल्टन यन आयोग ने भारत में 1926 ई. में प्रचलित मौद्रिक एवं साख प्रणाली में सुधार की आवष्यकता को स्पष्ट करते हुए एक केन्द्रीय बैंक की स्थापना करने का सुझाव दिया। आयोग की सिफारिषें के आधार पर सरकार ने केन्द्रीय बैंक की स्थापना हेतु एक बिल 1927 ई में विधान सभा में प्रस्तुत किया जो दर्भाग्यवष पारित नही हो सका। पुनः 1930 ई. में केन्द्रीय बैकिंग जाॅच सामिति ने केन्द्रीय बैंक की स्थापना की सिफारिष की, जिसके आधार पर 8 सितम्बर, 1933 को विधान सभा में सरकार ने रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया विधेयक प्रस्तुत किया, जिसे विधान सभा ने पारित कर दिया। इस विधेयक पर 6 मार्च 1934 को गवर्नर जनरल द्वारा हस्ताक्षर किये गये। तत्पष्चात 1 अप्रेल 1935 को 5 करोड रूपय की अंष पूॅजी के साथ (100 रूपये के पूर्णतया प्राप्त अंषो के साथ) इसकी स्थापना की गई।
प्रारम्भ में यह बैंक अंषधारियों के बैंक अंषधारियों के बैंक के रूप में कार्य करता था, जिसकी लगभग सारी पूंजी निजी अंषधारियों की थी। 2,22,000 रूपये के अंष ही सरकार के पास थे। इस रूप में बैंक ने स्वतंत्रता प्राप्ति के समय तक काम किया, परन्तु 1 जनवरी 1949 को इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। तब से यह केन्द्र सरकार के स्वामित्व में है।

रिजर्व बैंक का प्रबंधन

रिजर्व बैंक का प्रबंध और संचालन एक बीस संदस्यीय केन्द्रीय निदेषक बोर्ड करता है, जिसमें एक गवर्नर, चार उप-गवर्नर, भारत सरकार केवित्त मंत्रालय का एक अधिकारी व सरकार द्वारा मनोनीत दस निदेषक जो देष के आर्थिक जीवन के महत्तवपूर्ण पहलुओं का प्रतिनिधित्व करते है तथा चार स्थानीय बोर्डो का प्रतिनिधित्व करने वाले चार निदेषक (केन्द्र सरकार द्वारा ही मनोनित) होते है।
मुम्बई स्थित प्रधान कार्यालय के अलावा रिजर्व बंैक के चार स्थानीय बोड मुम्बई कोलकत्ता नई दिल्ली और चेन्नई में है, जो स्थानीय मुद्दों का अध्ययन करके केन्द्रीय बोर्ड को परामर्ष देते है। प्रत्येक स्थानीय बोर्ड में केन्द्र सरकार द्वार मनोनीत पाॅंच सदस्य होते है।
बैंक के प्रचलन तथा बैकिंग विभाग मुम्बई, कोलकाता, जयपुर, चेन्नई, नई दिल्ली, बायखला (मुम्बई), बंगलौर, नागपुर तथा कानपुर में स्थित है। इसका एक कर्यालय लन्दन में भी है।

रिजर्व बैंक के प्रमुख कार्य

भारत का केन्द्रीय बैंक होने के कारण रिजर्व बैंक के कार्य अत्यन्त विस्तुत है, जिन्हें दो वर्गो में बाटा जा सकता है –
;।द्ध सामान्य केन्द्रीय बैकिंग कार्य: इस वर्ग में अन्तर्गत निम्न कार्यो का सम्पादन रिजर्व बैंक के द्वारा किया जाता है –

1. करेन्सी नोटों का निर्गमन
2. सरकारी बैंकर का काम करना
3. बैंको के बैंक का कार्य करना
4. विदेषी विनिमय का नियंत्रण
5. साख नियंत्रण (ब्तमकपज ब्वदजतवस)
6. कृषि वित की व्यवस्था करना

;(B)  विकास संबंधी एवं प्रवतन कार्य: रिजर्व बैंक भारत के विकास और प्रवर्तन संबंधी अनेक कार्यो को सम्पादित करने में लगा हुआ है। उदाहरणार्थ ग्रामीण तथा पिछडे क्षेत्रों में वाणिज्यिक बैकों की नवीन शाखाएॅ खुलवाना, लोगो में बचत की आदत डलवाना, उन्हें ग्रामीण साहूकारों व सूदखोरों के चंगुल से आजाद कराना, कृषि हेतु संस्थागत ऋण उपलब्ध कराना आदि। बैकों के जमाकर्ताओं को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देष्य से 1962 ई. में जीवन बीमा निगम की तथा बचतो को प्रोत्साहित करने हेतु 1964 ई. में यूनिट ट्रस्ट इंडिया की स्थापना की गई। कृषि के विकास हेतु सहकारी समितियों के विकास को प्रोत्साहित करने में रिजर्व बैंक की महत्तपूर्ण भूमिका रही है। इसी प्रकार औद्योगिक विकास हेतु भारतीय औद्योगिक वित निगम और राज्य वित्त नियमों, भारतीय औद्योगिक विकास बैंक आदि की स्थापना की गई। इन सभी विकास कार्यो में रिजर्व बैंक की भूमिका अत्यंत महत्तवपूर्ण रही है।

R.B.I. के प्रमुख कार्य:
(1) पत्र मुद्रा का निर्गमन: 2 रूपय से लेकर 1 हजार तक के मुख्य सभी नोट जारी करने का कार्य त्ठप् करता है। प्रारम्भ में नोट जारी करने की प्रणाली अनुपातिक कोष प्रणाली थी अर्थात 60 प्रतिषत मूल्य सरकारी प्रतिभूती या रूपये में तथा 40 प्रतिषत सोन व विदेषी प्रतिभूती में। अक्टुबर 1956 से न्यूनतम कोष प्रणाली अपनाई गई। इसके अन्तर्गत 515 करोड की प्रतिभूति न्यूनतम रूप से रखना होगा जिसमें 400 करोड की विदेषी प्रतिभूतियाॅ तथा 115 करोड का स्वर्ण रखना अनिवार्य है। वर्तमान में यही प्रणाली प्रचलित है।
(2) बैंको का बैंक: यह सभी प्रकार के बैंको पर नियत्रण करता है और इन्हे अन्तिम रूप से ऋण भी प्रदान करता है।
(3) सरकार का बैंक: यह केन्द्र तथा राज्य सरकारो के बैंकर के रूप में कार्य करता है तथा केन्द्र को अल्पकालीन ऋण भी उपलब्ध कराता है।
विदेशी विनिमय कोष का प्रबंध भी करता है। यह केन्द्रीय बैंक के सभी विदेषी लेन-देन को भी नियमित कराता है। अर्थात विदेषी ऋण के संबंध में सरकार के प्रतिनिधि का रूप में कार्य करता है।
(4) सााख नियंत्रक( Credit Control½ : रिजर्व बैंक आफ इंडिया अर्थव्यवस्थ में व्याप्त मंदी या मुद्रा स्फीति को दूर करने के लिए साख नियंत्रण की क्रिया अपनाती है इसे ही साख नियंत्रण के मौदिक उपाय भी कहते है –

प्रिमाणात्मक उपाय:
(1) बैंक दर: बैंक दर वह दर है जिसे दर पर केन्द्रीय बैंक व्यवसायिक बैंकों के उधार या ऋण देता है। इसी को बिलों की पूनरकटौती भी कहते है। इसकी वर्तमान दर 6 प्रतिषत है मुद्रा स्फीति के दिनों में इसे बढावा दिया जाता है तो मंदी के दौर में इसे घटा दिया जाता है।
(2) खुले बाजार की क्रियाए इसके अन्तर्गत प्रतिभ्ूाूतियों में व्यापार करती है अर्थात जब मुद्रा स्फीति की स्थिति होगी त बवह प्रतिभूतियों को बेचेगी। इसके विपरीत मंदी के दिनों में प्रतिभूतियों की खरीद लेती है।
(3) परिवर्तन कोष अनुपात: साख नियंत्रण के सार्वधिक उपर्युक्त उपाय इसी में शामिल है।
CRR: RBI  के नियमानुसार प्रत्येक वाणिज्यिक बैंक अपनी प्रारम्भिक जमा का 3 से 15 प्रतिषत तक RBI के पास रखता है। RBI अर्थव्यवस्था की स्थिति के अनुसार इसे घटा-बडा सकती है। वर्तमान में इसकी दर 6 प्रतिषत है।

  SLR:(Statury Liquidity Ratio) : RBI के नियमानुसार प्रत्येक वाणिज्यिक बैंक अपनी प्रारम्भिक जमा का 25-35 प्रतिषत तक अपने पास रख सकता है। जिसे RBI आवष्यकतानुसार बदलती रहती है। वर्तमान में इसकी दर 25 प्रतिषत है।
नोट: 2008 में इसकी न्यूनतम सीमा भी समापत कर दी गई इसे घटा कर 24 प्रतिषत कर दिया गया है।
अल्प कालिक ऋण के उपाय:

1) REP(RE PURCHASE OPTION) : जब भारत सरकार अर्थव्यवस्था मं व्याप्त मंदी को दूर करने के लिए अल्पकालीन ऋण लोगो को देती है तो इसे त्मचव कहा जाता है। इससे तरलता में वृद्धि होती है।
(2) Reverse Repo :  जब अर्थव्यवस्था से मुद्रा स्फीति को कम करनी होती है त बवह इसका उपयोग करती है। दोनों की दरे क्रमषः 6 और 5 प्रतिषत है।

भारतीय रूपया: भारतीय रूपया दषमलव प्रणाली पर आधारित है। 1957 से पूर्ण रूपया एकन्नी, दुअन्नी, चवन्नी के अनुपात में बॅटा होता है। 1957-64 के बीच नए पैसे में बदल गया। 1964 के पष्चाात नया पैसा-पैसे मं बदल गया। 1 रूपय की नोट वित मंत्रालय द्वारा जारी की जाती है। इस पर वित सचीव के हस्ताक्षर होता है। वर्तमान में इसे बंद कर दिया गया है।

 

भारतीय वाणिज्यिक बैंक
(Indian Commercial Bank)

ईस्ट इंडिया कम्पनी ने भारत में बैकिंग प्रणाली की नीव डाली। भारत में प्रथम मिश्रित पूंजी बैंक Bank of Hisndustan था, जिसका प्रबंधन ब्रिटिष हाथों में था। प्रथम पूर्णतया भारतीय मिश्रित बैंक अवध वाण्ज्यििक बैंक था जिसकी स्थापना 1881 ई. में हुई थी।1894 ई. में पंजाब नेषनल बैंक और 1901 ई. में पीपुल्स बैंक की स्थापना हुई। 1913 ई. तक 5 लाख रूपये या इससे अधिक पूंजी वाले बैंको की संख्या सिर्फ 18 थी। 1921 ई. में वर्तमान तीनो प्रेसीडंसी बैंको का विलय करके इम्पीरियल बैंक की स्थापना की गई। स्वतंत्रता पूर्व बैकिंग व्यवस्था में काफी अस्थायित्व था और अनेक बैंक असफल हो गये थे, जैसे बैंक आफ अपर इंडिया, एलायंस बैंक आफ षिमला, ट्रवनकोर नेषनल और क्वीनल बैंक आदि।
भारत में वाणिज्यिक बैंको को दो वर्गो में वर्गीकृत किया जा सकता है – 1 अनुसूचित बै।क और 2 गैर-अनुसूचित बैंक। अनुसूचित बैंक वे है, जिनका नाम रिजर्व बैंक की द्वितीय अनुसूची में उन्हीं बैंको के नाम पंजीकृत होते है, जिनकी चुकता पंूजी और कूल जमा मिलाकर पांच लाख रूपये से अधिक है। इन बैंको को अपनी कुल मांग देयताओं तथा सावधि देयताओं का 3 प्रतिषत भाग रिजर्व बैंक के पास नकद कोष के रूप में जमा करना पडता है। रिजर्व बैंक को इस नगद कोष को 15 प्रतिषत तक करने का अधिकार प्राप्त है। साथ ही ये बैंक अपना लेखा-जोखा हर सप्ताह रिजर्व बैंक के समक्ष प्रस्तुत करते है।
पंच लाख से कम चुकता पूंजी और जमा रखने वाले बैंक गैर-अनुसूचित बैंक कहलाते है, जिन रिजर्व बैंक का कोई महत्तवपूर्ण नियंत्रण नही होता। इन बैंको को अपना लेखा-जोखा प्रत्येक महा रिजर्व के सामने प्रस्तुत करना होता है। इन्हें भी अपने कुल जमा का एक निष्चित भाग रिजर्व बैंक के पास रखना होता है।

  (1)भारतीय स्टेट बैंक
पूर्व नाम: बैंक आफ कलकत्ता (1806 ई.). बैंक आफ बंगाल (1806 ई.) और इंपीरियल बैंक आफ इंडिया (1821 ई.)।
स्थापना वर्ष: 1806 ई.
संस्थापक: बंगाल सरकार।
राष्ट्रीयकरण: 1955 ई.
प्रधान कार्यालय: मुबंई (महराष्ट्र)।
हिस्सेदारी: 59.73 प्रतिषत (आर.बी.आई)।
परिसंपत्ति: 4812 करोड रूपये।

 

1 जनवरी 1949 को रिजर्व बैंक राष्ट्रीयकरण के साथ ही बैकिंग नियमन अधिनियम पारित किया गया, जिसके द्वाराभारतीय रिजर्व बैंक को वाणिज्यिक बैंको पर नियंत्रण रखने का विस्तृत अधिकार प्राप्त हो गया। यद्यपि ग्रामीण बैकिंग जाॅच समिति (1950 ई.) इप्मीरियल बैंक के राष्ट्रीयकरण के पक्ष मे नही थी, पर अखिल भारतीय साख सर्वेक्षण समिति (1952 ई.) ने इम्पीरियल बैंक के साथ कुछ राज्य सम्बंद्ध बंैको को मिलाकर स्टेट आॅफ इंडिया की स्थापना की सस्तुति की। फलस्वरूप 1 जुलाई 1955 से इम्पीरियल बैंक के सभी सम्पत्तियों तथा देनदारियों को अधिग्रहण करके भारतीय स्टेट बैंक ने कार्य करना शुरू किया।
सार्वजनिक क्षेत्र में दो प्रकार की बैंक कार्यरत है – 1 भारतीय स्टेट बैंक समूह तथा 2 अन्य राष्ट्रीयकृत बैंक। व्यापारिक बैंक वर्ग के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र में दो भारतीय स्टेट बैंक शीर्ष स्थान की बैंक है। जून 2006 के अंत मे स्टेट बैंक आफ समूह की 13501 शाखाएॅ कार्य कर रही थी। वर्तमान समय में भारतीय स्टेट बैंक समूह की 15000 से अधिक शाखा हो चुके है। अभी एस.बी.आई देष का सबसे बडा बैंक तथा शाखाओ की संख्या की दृष्टि से विष्व का सबसे बडा बैंक है।
ैठप् के राष्ट्रीयकरण के बाद 1959 ई. में इसके साथ अन्य 8 बैंको (वर्तमान में केवल 5) को SBI के सहायक (Associat Bank) बैंक के रूप में बदल दिया गया था और इसे स्टेट बैंक आफ समूह (State Bank Of Group) का नाम दिया गया। 24 जुलाई 2008 को स्टेट बैंक आॅफ सौराष्ट्र एवं 26 अगस्त 2010 को स्टेट बैंक आफ इंदौर को भारतीय स्टेट बैंक में विलय कर दिया गया। इस प्रकार वर्तमान में भारतीय स्टेट बैंक के सहायक (स्टेट बैंक एसोसिएटस्) पाॅच बैंक निम्नलिखित है –

 

(2) स्टेट बैंक आफ बीकानेर एंड जयपुर
पूर्व नाम: द गोविंद बैंक प्राइवेट लिमिटेड
राष्ट्रीयकरण: 1959 ई.।
प्रधान कार्यालय: जयपुर (राजस्थान)।
हिस्सेदारी: 75 प्रतिषत (एस.बी.आई)
नोट: 1955 ई. में बीकानेर और जयपुर के अलग-अलग स्टेट बैंक थे, जिन्हें बाद में मिलकर एक कर दिया गया।

(3) स्टेट बैंक आफ हैदराबाद
पूर्व नाम: हैदराबाद स्टेट बैंक।
स्थापना वर्ष: 1941 ई.।
राष्ट्रीयकरण: 1959 ई.।
प्रधान कार्यालय: हैदराबाद (आंध्र प्रदेष)।
हिस्सेदारी: 100 प्रतिषत (एस.बी.आई)
नोट: 1955 ई. में बीकानेर और जयपुर के अलग-अलग स्टेट बैंक थे, जिन्हें बाद में मिलकर एक कर दिया गया।

(4) स्टेट बैंक आफ मैंसूर
पूर्व नाम: हैदराबाद स्टेट बैंक।
स्थापना वर्ष: 1913 ई.।
संस्थापक: एम. विष्वेष्वरैया।
राष्ट्रीयकरण: 1959 ई.।
प्रधान कार्यालय: बंगलौर (कर्नाटक)।
हिस्सेदारी: 92.33 प्रतिषत (एस.बी.आई)

(5) स्टेट बैंक आफ पटियाला
पूर्व नाम: पटियाला स्टेट बैंक।
स्थापना वर्ष: 1917 ई.।
संस्थापक: महाराजा भूपिंदर सिंह।
राष्ट्रीयकरण: 1959 ई.।
प्रधान कार्यालय: पटियाला (पंजाब)।
हिस्सेदारी: 100 प्रतिषत (एस.बी.आई)।

(6) स्टेट बैंक आफ ट्रेवेनकोर
पूर्व नाम: ट्रेवेनकोर बैंक लिमिटेड।
स्थापना वर्ष: 1945 ई.।
राष्ट्रीयकरण: 1959 ई.।
प्रधान कार्यालय: त्रिवंद्रम (केरल)।
हिस्सेदारी: 75 प्रतिषत (एस.बी.आई)।

अन्य राष्ट्रीयकृत बैंक

(7) इलाहाबाद बैंक
स्थापना वर्ष: 1865 ई.।
राष्ट्रीयकरण: 19 जुलाई 1969।
प्रधान कार्यालय: कोलकाता (पष्चिम बंगाल)।
हिस्सेदारी: 55.23 प्रतिषत (केन्द्र सरकार)।

(8) आंध्रा बैंक
स्थापना वर्ष: 1923 ई.।
संस्थापक: डाॅ. बी. पटटामि सीतारमैया।
राष्ट्रीयकरण: 15 जुलाई 1980।
प्रधान कार्यालय: हैदराबा (आन्द्र प्रदेष)।
हिस्सेदारी: 62.50 प्रतिषत (केन्द्र सरकार)।
परिसंपत्ति: 48 करोड रूपये।

(9) बैंक आफ बड़ौदा
स्थापना वर्ष: 15 जुलाई 1908 ई.।
संस्थापक: महाराजा सयाजीराव – प्प्प्
राष्ट्रीयकरण: 19 जुलाई 1969 ई.।
प्रधान कार्यालय: मुम्बई (महाराष्ट्र)।
हिस्सेदारी: 66.83 प्रतिषत (केन्द्र सरकार)।
परिसंपत्ति: 1554 करोड़ रूपये।

(10) बैंक आफ महाराष्ट्र
स्थापना वर्ष: 1935 ई.।
राष्ट्रीयकरण: 19 जुलाई 1969 ई.।
प्रधान कार्यालय: पुने (महाराष्ट्र)।
हिस्सेदारी: 76.77 प्रतिषत (केन्द्र सरकार)।
परिसंपत्ति: 280 करोड़ रूपये।

(11) केनरा बैंक
पूर्व नाम: केनरा बैंक हिन्दु परमानेंट फंड।
स्थापना वर्ष: 1906 ई.।
संस्थापक: ए सुब्बराव पाई।
राष्ट्रीयकरण: 19 जुलाई 1969 ई.।
प्रधान कार्यालय: बंगलौर (कर्नाटक)।
हिस्सेदारी: 73.17 प्रतिषत (केन्द्र सरकार)।
परिसंपत्ति: 1125 करोड़ रूपये।

(12) सेंट्रल बैंक आॅफ बैंक
स्थापना वर्ष: 1911 ई.।
संस्थापक: सोराब्जी पोच्खानवाला।
राष्ट्रीयकरण: 19 जुलाई 1969।
प्रधान कार्यालय: मुम्बई (महाराष्ट्र)।
परिसंपत्ति: 814 करोड रूपये।

(13) काॅपोरेषन बैंक
स्थापना वर्ष: 1906 ई.।
राष्ट्रीयकरण: 15 अपे्रल 1980।
प्रधान कार्यालय: मंगलौर (कर्नाटक)।
हिस्सेदारी: 57.19 प्रतिषत (केन्द्र सरकार)
परिसंपत्ति: 206.8 करोड रूपये।

(14) देना बैंक
पूर्व नाम: देवकरण नान्जी बैकिंग कम्पनी लिमिटेड।
स्थापना वर्ष: 1938 ई.।
संस्थापक: प्राण लाल देवकरण नान्जी।
राष्ट्रीयकरण: 19 अपे्रल 1969।
प्रधान कार्यालय: मुंबई (महाराष्ट्र)।
हिस्सेदारी: 51.19 प्रतिषत (केन्द्र सरकार)
परिसंपत्ति: 591 करोड रूपये।

(15) इंडियन बैंक
स्थापना वर्ष: 1907 ई.।
राष्ट्रीयकरण: 19 अपे्रल 1969।
प्रधान कार्यालय: चेन्नई (तमिलनाडु)।
परिसंपत्ति: 418 करोड रूपये।

(16) इंडियन ओवरसीज बैंक
स्थापना वर्ष: 1937 ई.।
संस्थापक: एम चिदंबरम् चेतियार।
राष्ट्रीयकरण: 19 अपे्रल 1969।
प्रधान कार्यालय: चेन्नई (तमिलनाडु)।
हिस्सेदारी: 75 प्रतिषत (भारत सरकार)
परिसंपत्ति: 319 करोड रूपये।

(17)ओरिएंटल बैंक आॅफ काॅमर्स
स्थापना वर्ष: 1943 ई. (लाहौर)।
संस्थापक: रामबहादुर लाला सोहन लाल।
राष्ट्रीयकरण: 15 अपे्रल 1980।
प्रधान कार्यालय: कनाॅट प्लेस, नई दिल्ली।
हिस्सेदारी: 66.5 प्रतिषत (भारत सरकार)।
परिसंपत्ति: 327 करोड रूपये।

(18) पंजाब एंड सिंध बैंक
स्थापना वर्ष: 1908 ई.।
राष्ट्रीयकरण: 15 अपे्रल 1980।
प्रधान कार्यालय: राजेन्द्र प्लेस, नई दिल्ली।

(19) पंजाब नेषनल बैंक
स्थापना वर्ष: 1895 ई. (लाहौर)।
राष्ट्रीयकरण: 19 अपे्रल 1969।
प्रधान कार्यालय: भीमाजी कामा प्लेस, नई दिल्ली।
हिस्सेदारी: 57.79 प्रतिषत (भारत सरकार)।
परिसंपत्ति: 119 करोड रूपये।

(20) सिंडिकेट बैंक
स्थापना वर्ष: 1925 ई.।
संस्थापक: यू.एस.पाई. , वमन कुआ एवं टी.एम.ए. पाई।
राष्ट्रीयकरण: 19 अपे्रल 1969।
प्रधान कार्यालय: मणिपाल (कर्नाटक)।
हिस्सेदारी: 73.52 प्रतिषत (भारत सरकार)।
परिसंपत्ति: 425 करोड रूपये।

(21) यूको बैंक
पूर्व नाम: यूनाइटेड काॅमर्षियल बैंक लिमिटेड।
स्थापना वर्ष: 1943 ई.।
राष्ट्रीयकरण: 19 अपे्रल 1969।
प्रधान कार्यालय: कोलकाता (पष्चिम बंगाल)।
हिस्सेदारी: 74.98 प्रतिषत (भारत सरकार)।
परिसंपत्ति: 810 करोड रूपये।

(22) यूनियन बैंक आॅफ इंडिया
स्थापना वर्ष: 1919 ई.।
राष्ट्रीयकरण: 19 अपे्रल 1969।
प्रधान कार्यालय: मुंबई (महाराष्ट्र)।
हिस्सेदारी: 60.85 प्रतिषत (केन्द्र सरकार)।
परिसंपत्ति: 1375 करोड रूपये।

(23) यूनाइटेड बैंक आॅफ इंडिया
पूर्व नाम: यूनाइटेड बैंक आॅफ इंडिया लिमिटेड।
स्थापना वर्ष: 1950 ई.।
राष्ट्रीयकरण: 19 अपे्रल 1969।
प्रधान कार्यालय: कोलकाता (पष्चिम बंगाल)।
परिसंपत्ति: 227 करोड रूपये।

(24) विजया बैंक
स्थापना वर्ष: 1931 ई.।
संस्थापक: ए.बी. शटटी।
राष्ट्रीयकरण: 15 अपे्रल 1980।
प्रधान कार्यालय: बंगलौर (कर्नाटक)।
हिस्सेदारी: 53.87 प्रतिषत (केन्द्र सरकार)
परिसंपत्ति: 227 करोड रूपये।

वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण

पहले निजी बैंक अपने धन की सुरक्षा और लाभ दृष्टि से केवल बडे उद्योगपतियों और व्यापारियों को ही ऋण दिया करती थी। भारत की आर्थिक उन्नति की दृष्टि से एवं देष की गरीबी दूर करने के विचार से यह आवष्यक समझा गया कि कमजोर वर्गो को वित्तीय सहायता दी जाए। अतः बैंकों की ऋण नीति मंे परिवर्तन आवष्यक था। यह सोचा गया कि कमजोर वर्गो को बिना प्रतिभूति के ऋण देने की व्यवस्था की जाए। निजी क्षेत्र में ऐसा करना सम्भव नही था। अतः ऐसी स्थिति में बैंकों का राष्ट्रीयकरण आवष्यक हो गया था।
इसी से सम्बद्ध अन्य उद्देष्य भी थे, जैसे – बैंको की शाखाए प्रायः शहरी क्षेत्रों में ही थी। गाॅवों और कस्बों में बैंकों की शाखाए स्थापित करना आवष्यक था, साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों से धनराषि एकत्र करने के लिए तथा बैंको का क्षेत्र बढाने के लिए उनको ग्रामीण जनता के निकट ले जाना आवष्यक था। यह निजी क्षेत्र में सम्भव नही था।
बैंक कम-से-कम जोखिम का काम करती है। इस कारण कृषि एवं लघु उद्योगों की सहायता करने के लिए उनका राष्ट्रीयकरण आवष्यक हो गया था। बैंको पर पूजीपतियों का प्रभाव था, वे बैंको के द्वारा अनुचित रूप से लाभान्वित हो रहे थे और सामान्य जनोपयोगी हितों की अपेक्षा हो रही थी।
अतः बैंको को राष्ट्रीय नियोजन की मुख्य धारा में जोडने के उद्देष्य से सरकार ने 19 जुलाई 1969 को 14 बडे व्यापारिक बैंक, जिनकी जमाए 50 करोड रूपये से अधिक थी। का राष्ट्रीयकरण कर दिया। ये बैंक निम्नलिखित है –

      बैंक का नाम                                                               प्रधान कार्यालय
1. सेंट्रल बैंक आॅफ इंडिया                                                      मुम्बई
2. पंजाब नेषनल बैंक                                                           नई  दिल्ली
3. बैंक आॅफ इंडिया                                                              मुम्बई
4. यूनाइटेड काॅमर्षियल बैंक                                                  कोलकाता
5. सिण्डीकेट बैंक                                                                 मणिपाल
6. केनरा बैंक                                                                      बंगलौर
7. बैंक आॅफ बडौदा                                                              मुम्बई
8. देना बैंक                                                                            मुम्बई
9. इलाहाबाद बैंक                                                                कोलकाता
10. इंडियन बैंक                                                                      चेन्नई
11. इंडियन ओवरसीज बैंक                                                        चेन्नई
12. बैंक आॅफ महाराष्ट्र                                                             पुणे
13. यूनाइटेड बैंक आॅफ इंडिया                                            कोलकाता
14. यूनियन बैंक आॅफ इंडिया                                                    मुम्बई

नये बीस सूत्रोय कार्यक्रम को गति देने के लिए तथा प्राथमिक क्षेत्र (Priority Sector)  को ऋण देने के लिए अतिरिक्त धन की आवष्यकता थी। अतः पुनः 15 अप्रेल 1980 को सरकार ने 6 बडे व्यापारिक बैंकों, जिनकी जमाए 200 करोड रूपये से अधिक थी, का राष्ट्रीयकरण कर दिया। इन छैः बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर देने से सरकार को 945 करोड रूपये की धनराषि तत्काल उपलब्ध हो गई। इसके साथ ही यह बात भी सामने थी कि सरकार बैंकी ऋण नीति पर अधि प्रभावषाली नियंत्रण कर सकेगी। ये नये राष्ट्रीयकृत बैंक थे –

    बैंक का नाम                                                          प्रधान कार्यालय
   1. आन्ध्र बैंक                                                               हैदराबाद
   2. पंजाब एण्ड सिंध बैंक                                                नई दिल्ली
   3.ओरिएण्टल बैंक आॅफ काॅमर्स                                   नई दिल्ली
   4. विजया बैंक                                                             बंगलौर
   5. काॅर्पोरेषन बैंक                                                         मंगलौर
   6. न्यू बैंक आॅफ इंडिया

नोट:- वर्तमान में राष्ट्रीयकृत व्यापारिक बैंको की कुल संख्या 20 से घटकर 19 रह गई है, क्योकि 4 सितम्बर 1993 को सरकार ने न्यू बैंक आॅफ इंडिया नेषनल बैंक में विलय कर दिया है।

11 अक्टुबर 2004 में भारतीय औद्योगिक विकास बैंक (IDBI) का राष्ट्रीयकरण कर देने के उपरांत राष्ट्रीयकृत बैंकों की संख्या पुनः वर्तमान में 20 हो गई है।

निजी बैंको का सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंको में विलय:-


क्र. निजी क्षेत्र के बैंक 
                                                                    जिसमें विलय किया गया
1. बैंक आफ कोचीन                                                                     स्टेट बैंक आफ इंडिया
2. लक्ष्मी काॅमर्षियल बैंक                                                                  केनरा बैंक
3. बैंक आफ इंडिया                                                                      स्टेट बैंक आफ इंडिया
4. हिन्दुस्तान काॅमर्षियल बैंक                                                             पंजाब नेषनल बैंक
5. मिराज स्टेट बैंक                                                                          यूनियन  बैंक आफ इंडिया
6. ट्रेडर्स बैक                                                                                  बैंक आफ बडौदा
7. बैंक आफ के्रडिट काॅमर्स                                                          स्टेट बैंक आफ इंडिया
8. बैंक आफ तमिलनाडु                                                                 इंडियन ओवरसीज बैंक
9. तंजावुर बैंक                                                                                इंडियन बैक
10. पारूल सेन्ट्रल बैक                                                                     बैंक आफ इंडिया
11. यूनाइटेड इण्डस्ट्रियल बैक                                                           इलाहाबाद बैंक
12. पूर्वाचल बैंक                                                                             सेण्ट्रल बैंक आफ इंडिया
13. बैंक आफ करड़                                                                      बैंक आफ इंडिया
14. बरेली काॅरपोरेषन बैंक                                                                बैंक आफ बड़ौदा
15. सिक्किम बैंक                                                                            यूनियन बैंक आफ कामर्स
16. बनारस स्टेट बैंक                                                                       बैंक आफ बडौदा
17. पंजाब कोआपरेटिव बैंक                                                           ओरिएण्टल बैंक आफ काॅमर्स
18. दोआब बैंक                                                                               बैंक आफ बडौदा
19. नेदुनगडी बैंक                                                                            पंजाब नेषनल बैंक
20. ग्लोबल ट्रस्ट बैंक                                                                        आरिएण्टल बैंक आफ काॅमर्स

 

 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक(Regional Rural Bank)

बैंको के राष्ट्रीयकरण के पश्चात भी वाणिज्यिक बैंको की पहुॅज ग्रामीण स्तर तक नही हो पायी। ग्रामीण क्षेत्र बैंकिग सुविधाओं से वंचित ही रहे। विषेषकर कृषि क्षेत्र को बैंको का बहुत कम लाभ प्राप्त हुआ। कृषि एवं ग्रामीण कारिगरों को आर्थिक सहायता पहुचाने तथा उनकी बचतो को उपयुक्त आधार देने के उद्देष्य से आर जी सुरैया की अध्यक्षता में एक आयोग गठित किया गया जिसने जनवरी 1972 में अपनी रिर्पोट प्रस्तुत की, जिसमें आयोग ने ग्रामीण बैंको की संकल्पना प्रस्तत की। फलस्वरूप भारत में ग्रामीण साख की कमी को दूर करन के उद्देष्य से सरकार ने 26 सितम्बर 1975 को एक अध्यादेष द्वारा देषभर में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक RRB की घोषणा की। देष् मं 2 अक्टुबर 1975 को पांच क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक स्थापित किये गये।

1. मुरादाबात (उत्तर प्रदेष) – सिण्डीकेट बैंक
2. गोरखपुर (उत्तर प्रदेष) – स्टेट बैंक आफ इंडिया
3. भिवानी (हरियाणा) – पंजाब नेषनल बैंक
4. जयपुर (राजस्थान) – यूनाइटेड काॅमर्षियल बैंक
5. माल्दा (पष्चिम बंगाल) – यूनाइटेड बैंक आफ इंडिया

प्रत्येक क्षेत्र ग्रामीण बैंक की अधिकृत पूंजी ;(Authorised Capital)  1 करोड  रूपये और जारी और चूकता पूंजी(Issued and Paid up Capital)  25 लाख रूपये थी। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की हिस्सा पूंजी में केन्द्रीय सरकार द्वारा 50 प्रतिषत, राज्य सरकार द्वारा 15 प्रतिषत तथा लीड बैंक द्वारा 35 प्रतिषत का योगदान दिया जाता है।
इन बैंको द्वारा उपलब्ध करायी गयी साख सुविधा का 75 प्रतिषत ग्रामीण क्षेत्रो के कमजोर वर्गो को उपलब्ध करायी जाती है। 1 जून 1996 तक देष में इन बैंको की 19516 शाखाए थी तथा देष के 389 जिलों मं इनका फैलाब है। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सिक्किम और गोवा को छोडकर देष के सभी राज्यों में कार्यरत है। अभी देष में कुल 82 क्षत्रीय ग्रामीण बैंक है। इन बैंको ने 7500 करोड रूपये वार्षिक साख सुविधा उपलब्ध कराये हैं।

सहकारी ऋण समितियाॅ:- सहकारी वित प्रबंध ग्राम ऋण का सबसे सस्ता और उत्त्म स्त्रोत है। इसमें किसानों के शोषण का भय नही रहता। इसके द्वारा अल्पकालीन और मध्यकालीन ऋण उपलब्ध कराये गये है। इस समितियों द्वारा 1981 ई. में कृषि क्षेत्र में कुल आवष्यकता का 33 प्रतिषत ऋण चुकाया गया, जबकि 1़951-52 मे यह अनुपात केवल 3 प्रतिषत था ये समितियाॅ 86 प्रतिषत गाॅवों में फैली हुई है।
देष बैंकर:- ग्रामीण और सफाई क्षेत्रों में दो प्रकार के देषी बैंकर होते है। प्रथम सरकार के बैंकर, बैंकिग कार्य करने के साथ-साथ कृषि, व्यापार तथा अन्य कार्य भी करते है। दूसरी क्षेणी में वे बैंकर है, जिनका बैंकिग व्यवसाय ही मुख्य पेषा है। इनके ऋण देने की प्रणाली अत्यंत सरल है, ये उत्पादक और अनुत्पादक दोनों प्रकार के ऋण देते है। इनका अपने ग्राहको से प्रत्यक्ष व्यक्तिगत संबंध होता है। इसमें सामान्यतः ब्याज की दर अपेक्षतः अधिक होता है। 1951-52 में जॅहा इनके द्वारा कुल ग्रामीण ऋण का 70 प्रतिषत उपलब्ध कराया जाता था, वही वर्ष 1991 तक इनका भाग गिरकर 17.6 प्रतिषत हो गया।
व्यवसायिक बैंक:- भारत का पहला बैंक जो भारतीय द्वारा संचालित था। 1881 में अवध कामर्षियल बैंक के नाम स खोला गया। यह भारतीयों के प्रति सीमित दायित्व का बैंक था। जबकि पूर्णता भारतीय द्वारा संचालित बैंक पंजाब नेषनल बैंक (1894) था।
भारत के व्यवसायिक बैंक:- व्यवसायिक बैंक वे बैंक है जो जनता से बचत को जमा के रूप में स्वीकार करते है और उन्हें अल्पकालीन ऋण उपलब्ध करता है। उनका मुख्य उद्देष्य अपने लाभ को अधिकतम करना है। ये व्यवसायिक बैंक 3 रूपों में खाता खोल करके जनता की बचत को स्वीकारते है।
(1) चालू खाता: इसके अन्तर्गत ये जमा पर कोई ब्याज नही देते है बचत खाता धारक प्रतिदिन अपनी आवष्यकतानुसार कई बार लेन-देन कर सकता है। बैंक इस सुविधा चार्ज लगा सकता है।
(2) बचत खाता: खाता धारत सप्ताह में 2 से 3 बार तक ही पैसे निकाल सकता है तथा जमा कई बार कर सकता है। इस शर्त के पालनकर्ता को बैंक 3.5 प्रतिषत तब वार्षिक ब्याज देती है।
(3) मियादी खाता (Time Deposit) इसको FIX DEPOSIT भी कहते है। इसके अन्तर्गत खाता धारक अपनी धनराषि को स्वेच्छानुसार निष्चित अवधि के लिये कर देता है। जिस पर समयानुसार निष्चित ब्याज दर मिलती है।

व्यापारिक बैंक: व्यावसायिक बंैको में सबसे बडा बैंक SBI  है इसकी स्थापना अखिल भारतीय ग्रामीण साख सर्वेक्षण समिति (1952) जिसे मोखाला समिति भी कहते है। इसने इम्पीरियल बैंक को राष्ट्रीयकृत करने का सुझाव दिया था। इसी के आधार पर 1 जुलाई 1955 में इम्पीरियल बैंक का राष्ट्रीयकरण करके इसका नाम भारतीय स्टेट बैंक कर दिया गया।

 

नाबार्ड  NABARD(National Bank Of Agriculture And Rural Development) : स्थापना 12 जुलाई 1982 में की गई यह बैंक ग्रामीण विकास के लिए ऋण देता है और RBI के नियंत्रण में कार्य करता है।

शाखा बैंकिंग: एकाकी स्वामित्व एवं संस्था के अन्तर्गत दो या दो से अधिक बैंकिंग शाखाएॅ इसके अंदर कार्य करती है। शाखा बैंक आस्ट्रेलिया, कनाडा तथा इंडिया में प्रचारित है।

इकाई बैंक: एक कार्यालय में स्थित बैकिंग प्रणाली है यह U.S.A में प्रचारित है।

सर्व व्यापी बैंकिंग: जब वाणिज्यिक बैंक सामान्य बैकिंग क्रियाओं के साथ-साथ औद्योगिक ईकाईयो को दीर्धकालीन ऋण उपलब्ध कराए तब इस प्रकार के बैंक को सर्वव्यापी बैंक कहते है।
कोर बैंकिंग (CORE BANKING) जब कुछ बैंको की सेवाए आपस में नेट के माध्यम से जुड कर एक हो जाती है। इसी को इंटरनेट बैंक या E-BANKING भी कहते है। इसके अन्तर्गत किसी अन्य बैंक का ग्राहक अन्य में फण्ड को जमा कर या निकाला जा सकता हैं

FREE BANKING :  एक ऐसी व्यवस्था जिसमें नोट निर्गमन का कार्य केन्द्रीय बैंक के पास नही होता है बल्कि सभी बैंकों इसका अधिकार प्राप्त होता है।
नोट: स्टेट बैंक समूह की संख्या 7 से घटकर 6 हो गई क्योकि Bank  का विलय भारतीय Reserve Bank में कर दिया गया इसके पहले सौराष्ट्र बैंक का विलय SBI में दिया गया।

Credit Card & Debit Card : Credit Card उधार देने एक नया तरीका है इसकी शुरूवात 1920 में U.S.A। में की गई थी इसमें बयाज दर सामान्य ब्याज दर से काफी उचा होता है क्योकि Credit card के बिना किसी प्रतिभूमि के ऋण उपलब्ध कराती है।

Debit Card का सबसे अच्छा उदाहरण ।ATM (Automatic Tailer Machine) है।
बैंकिंग क्षेत्र से सम्बन्धित प्रमुख समीतियाॅ:
1. नरसिम्हन समीतिः 17 अगस्त 1991 में स्थापितकी गई इसका उददेष्य बैकिंग ढौया में परिवर्तन करना।
2. द्वितीय नरसिम्हन समिति: जुलाई 1998 में गठित की

गई थी जो बैंकों में कार्य दिक्षों में वृद्धि हेतु सुझााव दें
3. गोडपरिया समिति: इसके अध्यक्ष ड छ गोइपरिया थे इसकी स्थापना 1990 में की गई इसका उददेष्य ग्राहक सेवा सुधार था।

               बैंक का नाम                                                                स्थापना वर्ष                                        डददेष्य/प्रमुख कार्य

भारतीय औद्योगिक ऋण व विनियोग निगम (ICICI)                    जनवरी 1955                              औद्योगिक इकईयों को प्रोत्साहन देना एवं सहायता करना।

भारतीय औद्योगिक विकास बैंक(IDBI)                           जुलाई 1964                                     दीर्घकालीन औद्योगिक वित्त प्रदान करना।

राष्ट्रीय कृषि व ग्रामीण विकास बैंक (NABARD)               जुलाई 1982                                       ग्रामीण साख प्रदान करने वाला शीर्ष बैंक।

भारतीय निर्यात-आयात बैंक (EXAM  BANK)             जनवरी 1982                                     विदेश व्यापार से संबंद्ध कम्पनियों को वित्तीय                                                                                                                                                                  सहायता व सुविधाएॅ प्रदान करना।

भारतीय औद्योगिक पुननिर्माण बैंक (RBI)                         मार्च 1985                                         बीमार औद्योगिक इकाईयों के पुनरू़द्वार                                                                                                                                                                         के  लिए वित्त मुहैया करना।

राष्ट्रीय आवास बैंक (NHB)                                      मार्च 1988                                           आवास बनाने एवं सम्पत्ति के विकास के लिए वित्त                                                                                                                                                            प्रदान करना  गंदी बस्तियों का पुनर्विकास आदि।

भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI)                        अप्रैल 1990                                          लघु क्षेत्र के उद्योगों का विकास व सम्बंर्द्धन।

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