पाचन तंत्र (Digestive System) :-

आहार नाल(Alimentary (anal) :- 

1.मुॅह ;(Mouth):-  

तीन जोडी लार गं्रन्थियाॅ पाई जाती है, जिनसे लार निकलती है
लार भोजन को चिकनाहट प्रदान करती है।
लार में टायलिन व एमाइलेज एन्जाइम पाये जाते है जो भोजन के कार्बोहाइड्रेट भाग का पाचन करते है।
लार में उपस्थित लाइसोजाइ एन्जाइम जीवाणुओं को नष्ट करने का कार्य करता है।

2.दाॅंत (Teeth):-

मुॅह में चार प्रकार के दाॅत पाये जाते है –
कृतनक(Incisor)  काटने व कुतरने का कार्य
रदनक(anine) – चीरफाड (विषेषकर -माॅस)
अग्रचणर्वक (Premolar)
चवर्णक (Molar)  – भोजन को पीसने का कार्य

दन्त सूत्र(Dental Formula)  –

बच्चों में (0-12 वर्ष)

बच्चों में बीस दाॅंते पाये जाते है जिन्हे दूध के दाॅत/प्राथमिक दांत।
अस्थायी दांत कहते है।
वयस्क में 32 ज्ममजी पाये जाते है जिन्हें द्वितीयक दाॅत/स्थायी दाॅत कहते है।

  1.  वयस्क मनुष्य मेंIncisor, 4 Canine, 8 Premolar, 12 molar teethपाये जाते है।
  2.  मनुष्य के Life में Teeth दो बार आते है इसलिये द्विबारदन्ती (Heterodont)  कहते है।
  3.  मनुष्य केLife अलग दो प्रकार के होते है इसलिये विषमदन्ती ;(Heterodont) कहलाते है।
  4.  मनुष्य के Teeth जबडे की हडडी के गर्ल में लगे होते है। इसलिये गर्तदन्ती (Thecodont)  कहलाते है।

NOTE:- .
 a) दाॅतो का इनमैल(Enamel)  शरीर का सबसे कठोर पदार्थ होता है।
 b) हाथी दाॅत (tusk)  उपरी कृतनक (Upper Incisor)  दाॅत होता है।
c) शाकाहरियों में रदनक (canine) teeth इेमदजद्ध(absent) (Herbivovous) होता है, इसके स्थान पर एक रिक्त स्थान पाया जाता है, जिसे दन्तावकाष (Diastma)  कहते है।
म्गण् खरगोष, हाथी, हिरण आदि।
d) बच्चो में अग्रचवर्णक ;(Premolar) teeth absent होते है।
e) किषोर में 4 चवर्णक (molar teeth)  दाॅत absent होते है जिन्हें अक्लदाढ (wisdom)  कहते है।

3. ग्रसनी   (Phargnx) %&

 

a)  ग्रासनाल (ग्रसिका) व श्वासनाल के संयुक्त क्षेत्र को ग्रसनी कहते है।
b) ग्रसनी में काकलक/अलिजिव्हा(Uvula)  नामक रचना लटकी रहती है। जो भोजन करते समय/पानी पीते समय आंतरिक नासा छिद्रो को बंद करने का कार्य करती है।

4. ग्रास नाल (ग्रसिका) (Oesophagus) %&

a) ग्र्रसिका आहार नाह का वह भाग है, जिसमें भोजन का बिल्कुल भी पाचन नही होता है।

5. आमाष्य(Stomach) %&

a) अमाष्य में उपस्थित पेप्सीन एंजाइम प्रोटीन का पाचन करता हैं
b) अमाष्य में उपस्थित रेनिन एंजाइम दूध को दही में बदलता है।
रेनिन
दुध घुलनषील प्रोटीन दही अघुलनषील प्रोटीन – केसीनोजन कैसीन

Note:-.
1) बच्चो में रेनिन एंजाइम पाया जाता है जबकि वयस्कों में रेनिन एंजाइम ंabsent होता है।
2) वयस्कों में रेनिन के स्थान परHCL का निर्माण होने लगता है।
3) HCL का निर्माण अमाष्य में उपस्थित अम्लीय कोषिकाओं वगलदजपब बमससे के द्वारा होता है।
4) आमाश्य में उपस्थित मुख्य कोषिका या जायभोजन कोषिकाये निष्क्रिय एंजाइम-पेप्सिनोजन का स्त्रावण (secretion)  करती है।
5) अमाष्य के चारो ओर उपस्थित स्लेष्मा की झिल्ली(mucous membrane)आमाष्य को स्वपाचन से रोकती है।

6. छोटी आंत्र (Small Intestine):-

a) गृहणी(Duodenum)

 

b) अग्रक्षुदांतत्र (Jejanum)

 

 c) {kqnka=(Ileum)

NOTE:-

1) छोटी आंत्र के x`g.kh (Duodenum) वाले भाग में भोजन का सबसे अधिक पाचन होता है।
2) गृहणी एक  U  आकार की नरिका होती है, जिसमें अग्नााष्य ग्रंथि लगी होती है।

7.  vXuk’; (Pancreas) %&

 

 

अग्नाष्य से अग्नाष्य रस(Pencreatic juice)  रनपबमद्ध निकलता है।
अग्नाष्य रस में
कार्बोहाइड्रेट – एमाइलेज
वसा – लाछपेज
प्रोटीन’-प्रोटोएज, कार्बोक्सिपेप्आइडेज
न्यूक्लिक अम्ल – न्यूक्लिएज को पचाने वाले एंजाइम पाये जाते हैं।
इसलिये अग्नाष्य रस को पूर्ण पाचक रस (Complete digestive Jucie)  कहते है।

8. यकृत (Liver):-

a) यकृत में पित्तरस (Bite Juice) का निर्माण होता है।
b) पित्ररस का संग्रह पित्रासय (Gall Bladder) में होता है।
c) पित्ररस मल पदार्थो को पीला रंग प्रदान करता है तथा वसा का पायसीकरण(Emulsification) करता है।

Note :-.
1) पित्ररस में किसी भी प्रकार का एंजाइम नही पाया जाता जबकि अग्नांषय रस में सभी प्रकार के एंजाइम पाये जाते है।
2) पितरण में दो वर्णक पाये जाते है –
बिलिरूबिन (पीला रंग)
बिलिवर्डिन (हरा रंग)

Note :-

यंकृत के खराब हो जोने से पीलिया/कामला(Jaundice)रोग हो जाता है।

9. बडी आंत्र  (Large Intestine) %&

a) छोटी आंत व बडी आंत के मिलन स्तर पर एक अवषेषी अंग पाया जाता है, जिसे कृमिरूपी परिषोषिका (Verniform Appendix) कहते है।
b) बडी आंत में जल व औषधि का अवषोषण होता है।

Note :-.
1) बडी आंत में ई.कोलाई (E.coli) (इष्चिरिकिया कोलाई) नाम सहजीवी जीवाणु पाया जाता है।
2) पचित भोजन मलाषय में इकठठा होता रहता है तथा Return
3) अंत में गुदा ;(Anus)  द्वारा विसर्जित कर दिया जाता है।

Note :-

1) भोजन का पथित रूप –
2)मुॅह – बोलस (Bolus)

 

3) अमाष्य – काइम (chyne
4) गृहणी – काइल(chyne)
Note :-.
1) छोटी आंत की लंबाई बडी आंत से अधिक होती है।
2) बडी आंत की मोटाई छोटी आंत से अधिक होती है।

Note :-
1) शाकाहारियों के आहार नाल मांसाहारियों की तुल में अधिक लम्बी होती है क्योकि शाकाहारी भोजन में सेल्यूलोज उपस्थित होता है, जिसके पाचन के लिये अधिक लम्बे आहार नाल की आवष्यकता होती है।
2) सेल्यूलोज दुनिया में सबसे अधिक मात्रा में पाया जाने वाला पदार्थ है। यह पादपों की कोषिका भित्ति ;बमसस ूंससद्ध में पाया जाता है।
3) खरगोष सेल्यूलोज का पाचन न होने के कारण अपने ही मल पदार्थ को वापस खा जाता है, इस प्रक्रिय को स्वमलभोगिगा (coprophegy)  कहते है।
4) ज्ीवित अवस्था में आहार नाल की लम्बाई 5-6 मीटर होती है।
5) मृत्यु के पश्चात इसकी लम्बाई 7 से 8 मीटर हो जाती है।
6) पचित भोजन में स्केटाॅल, इण्डोल, क्रिसाॅल नामक रसायनों के बन जाने के कारण मल पदार्थ से बदबृ आती है।
7) आहार नाल को शरीर की जैव रसायन प्रयोगषाला कहते है।

 

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