भारतीय राज्य व्यवस्था एवं सविधान

 

प्रास्तावना

–> हम भारत के लोग भारत को एक सम्पूर्ण सम्पन्न, समाजवादी, पंथ निरपेक्ष, लोकतांत्रिक, गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिको को समाजिक आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय विचार अभिव्यक्ति विष्वास धर्म और उपासना की स्वतंत्रता प्रतिष्ठा और अवसर की समानता करने के लिए तथा उन सम में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिष्चित करने वाली बंधुता बढाने के लिये दृढं सकंल्प होकर अपनी इस सविचाान सभा में आज दिनंाक 26 नवंबर1949 ई0 (मितिमार्ग शीर्ष शुक्ल सप्तमी संवत् 2006 किमी) को एतद् इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते है।

प्रास्तावना का क्रम –

1. सप्प्रभता
2. समाजवादी
3. पंथ निरपेक्ष
4. लोकतांत्रिक
5. गणराज्य

महत्तवपूर्ण तथ्य

1) भारतीय संविधान का उद्देष्य/दर्षन प्रास्तावना में निहित है।
2) पूरा प्रास्तावना एक वाक्य में लिया गया है।
3) प्रजातांत्रिक समाजवाद की अवधारना पर नेहरू ने विकिस किया था।
4) भारतीय संविधान की अवधारना प0 नेहरू ने विकसित किया था।
5) भारतीय संविधान में न्याय शब्द का उल्लेख प्रास्तावना में किया गया है।
6) डा0 अम्बेडकर ने कहा लोकतंत्र की सबसे बडी बाधा जाति प्रथा है।
7) 42 वें संविधान संषोधन द्वारा प्रास्तावना में निम्नलिखित शब्द जोडे गए 1. समाजवादी 2. पंथ निरपेक्ष (राज्य का अपना कोई धम नही होगा) 3. राष्ट्र की एकताव अखण्डता

8) प्रास्तावना के अनुसार संविधान के अधीन सभी शक्तियों का स्त्रोत भारत के लोग (हम भारत के लोग) है। भारत में राजनीतिक शक्ति को स्त्रोत मतदाता होता है।
9) भारत में सम्प्रभुता जनता में निवास करती है।
10)प्रास्तावना में श्हम भारत के लोगश् की अवधारता अमेरिका संविधान से लिया गया है।
11)अमेरिका तथा अन्य देषो के संविधान के आरम्भ में ;ॅम जीम चमवचसमद्ध श्हम लोगश् एसो की आवाजा है।

प्रमुख शब्दावली –

1) सम्प्रभुता – जिसमें सर्वोच्च तथा अंतिम शक्ति निवास करती हो उसे सम्प्रभु कहते है।
2) समाजवादी – जहा व्यक्ति कम तथा समाज को अधिक महत्व दिया जाता है उसे समाजवादी व्यवस्था कहते है। भारत में व्यक्ति और समाज दोनो महत्व स्वीकार करते हुए अपने तरह का समाजवाद (मिश्रित अर्थव्यवस्था) लागू किया है।
3) विकास का भारतीय माडल व्यक्ति और राज्य (समाज दोनो के हितो की सुरक्षा करता है।)
4) धर्म निरपेक्ष/पंथ निरपेक्ष – जिसका अपना कोई धर्म/पंथ न हो बल्कि सभी धर्मो/पंथो को समान भाव से देखता हो उसे धर्म निरपेक्ष/पंथ निरपेक्ष कहते है।
5) लोकतंत्र – जनता का जनता के द्वारा जनता के लिए शासन लोकतंत्र कहलाता है।

NOTE :- यह परिभाषा अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन द्वारा गेटसवर्ग में दिया गया था।
गणतंत्र – जिस किसी देष का प्रमुख जनता द्वारा प्रत्यक्ष व परोक्षय रूप से निर्वाचित होता है उस राज्य गणतंत्र कहते है। लिच्छवियों द्वारा ईसा पूर्व छटी शताब्दी वैषाली में स्थापित किया था।
Note:- जनता के महत्व को स्वीकार कहते हुए दादाभाई नरौजी ने कहा था – श्राजा जनता के लिए बना है, जनता राजा के लिए नही।श्
राजय के 4 तत्व होते है –
1. जनसंख्या
2. भू-भाग
3. सरकार
4. सम्प्रभुता
a) जिसमें सम्प्रभुता सबसे महत्तवपूर्ण तत्व है। सम्प्रभुता को राज्य की आत्मा कहा जाता है।
b) राज्य के 4 तत्वो में सम्प्रभुता ही ऐसा तत्व है, जो अन्य समुदायों से राज्य की अलग करता है।

प्रास्तावना और संविधान :-

प्रास्तावना को संविधान की आत्मा कहा गया है। इसके द्वारा संविधान निर्माताओं ने भारतीय राज्य व्यवस्था की आवस्थाओं की प्रेरणाओं और मूलभूत आदर्षो को निर्धारित किया।

सभुाष कष्यप ने लिखा – श्संविधान शरीर है तो प्रास्तावना उसकी आत्मा। प्रास्तावना आधार षिला है तो संविधान उस पर खडी महल है।श्
a) केष्वानंद भारतीय वाद 1973 में प्रास्तावना संविधान का भाग स्वीकार किया गया ।
b) बोम्मई निर्णय (1994) में केष्वानंद के निर्णय को दुहराया गया। जबकि –
c) बेरूबारी (1960) के मामले सर्वोच्च न्यायालय ने प्रास्तावना को संविधान का भंग मान में (मान से) इंकार कर दिया था।
केषवानंद निर्णय में कहा गया चूंकि भारतीय संविधान की प्रास्तावना में उसी विधि से संषोधन किया जा सकता है जिस विधि से शेष संविधान में उससे स्पष्ट हो जाता है कि प्रास्तावना भारतीय संविधान का भाग है।
d) प्रास्तावना से संविधान निर्माताओं की मूल भावनाओं का पता चलता है। उसको संविधान कुंजी भी कहा जा सकता है। कहा जाता है।
इसी महत्व को देखते हुए पं0 भार्गव ने कहा प्रास्तावना संविधान का किमती अंग है।
e) बेरूबारी निर्णय (1960) में कहा गया था कि संविधान की भाषा जहा संदिग्ध हो वहा प्रास्तावना का सहारा लिया जा सकता है।
f) गांधी जी धर्म और राजनीति को अलग अलग नही मानते थे।
g) भारतीय सामाजिक व्यवस्था भी सामन्तवादी व्यवस्था पर आधारित थी स्वाभाविक है विषमता किन्तु सर्वप्रथम हम अंग्रेजी से स्वतंत्रता चाहते थे। अथक प्रयास के पष्चात जब भारत आजाद हुआ तो हम अपना संविधान बनाने के लिय स्वंतंत्र हो गये और शोषण प्रवृत्तियों का समापन किया गया। अतः फ्रांससी क्रंाति के आदर्ष वाक्य स्वतंत्रता समानता और बन्धुता को संविधान की आत्मा अर्थात प्रास्तावना में स्थान दिया गया।
h) प्रस्तावना सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक न्याय को निर्देषित करता है।
i) भारतीय संविधान की प्रस्तावना पर विभिन्न क्रांतियों को प्रभाव पडा था जिसमें –
1. फ्रांसीसी क्रांति (1789) (फ्रांस की क्रंाति का स्वस्थ्य बुर्जआ (मध्यम वर्ग) था।
2. अमेरिकी कं्राति 1776
3. बोन्सेविक क्रांति 1917 (हस/सोतिय संध)
 a) यह प्रस्तावना सदन के प्रत्येक सदस्य की इच्छा को समेटती है कि संविधान की जडे इसकी अर्धसत्ता इसकी सम्प्रभुता, जनसाधारण में निहित है।
– डाॅ0 बी0 आर0 अम्बडेकर

संवैधानिक विकास

1) कम्पनी के व्यापार एकाधिकार को समाप्त करके 1813 के अधिनिययम से अन्य ब्रिटिष प्रजाजनो को भी व्यापार को अधिकार दिया गया।
2) व्यापारिक और राजनीतिक कार्यो का व्यापारिक अधिकार समाप्त हो गया। अलगाव 1933 अधिनियम से अब कंपनी को केवल राजनीतिक कार्य का संचालन करना था।
3) गवर्नर जनरल को कानूनी मामलों पर वीेटो का अधिकार 1861 के अधिनियम से प्राप्त हुआ।
4) गर्वनर जनरल को अध्यादेष जारी की शक्ति का अधिकार 1861 के अधिनियम से प्राप्त।
5) भारतीयों को प्रतिनिधित्व सर्वप्रथम 1861 के अधिनियम से प्राप्त हुआ।
6) पहली बार अवभागीय एवं मंत्रिमण्डलीय प्रणाली की नींव 1861 के अधिनियम द्वारा रखी गयी।
7) व्यवस्थापिका के सदस्यों को सर्वप्रथम प्रषन पूछने का अधिकार 1892 के अधिनियम से प्राप्त।
8) वित्तीय मामलों पर बहस का अधिकार सर्वप्रथम 1892 के अधिनियम से प्राप्त हुआ।
9) संसदीय शासन प्रणालिकी शुरूवात 1892 के अधिनियम से मानी जाती है।

1909 अधिनियम या मार्ले मिटटी सुधार

1) प्रतिनिधिक तथा निर्वाचित तत्वों का समावेष करने का प्रथम प्रयास किया गया।

2)परिषद के आकार में वृद्धि की गयी।
3)कुछ निर्वाचित गेर संस्कारी सदस्य सम्मलित किए गये जिससे शासकीय बहुमत समाप्त हो गया।
4) केन्द्र के विधान परिषद में भी निर्वाचन का समावेष हुआ किन्तु शासकीय बहुमत बना रहा।
5)विधान परिषद में विचार विमर्ष के कृत्यों में वृद्धि की गयी जिससे बजट या लोकहित के किसी विषय पर पूरक प्रथम पूछने तथा संकल्प स्थापित करके प्रषासन की नीति पर प्रभाव डाला जा सके, किन्तु कुछ विषयो को इससे बाहर रखा गया था।
(1)सषस्त्र बल, (2)विदेषी कार्य, (3)देषी रियासते
6) मुस्लिम समुदाय के लिए पृथक निर्वाचन व्यवस्था।
7) अग्रंेजी द्वारा फूट डालो और राज करो की नीति 1905 के बंगाल विभाजन (कर्जन) से प्रारम्भ से गयी थी। किन्तु सरकार स्तर पर प्रथम बार प्रयास फुट डालो राज करो की नीति 1909 के मार्ले-मिंटो सुधार में मुस्लिमों को साम्प्रदायिक प्रतिनिधितव द्वारा प्रारम्भ किया गया था।

1919 का अधिनियम (प्रान्तो में द्वैध शासन की व्यवस्था)

a) प्रंातीय विषय – आरक्षित, अनारक्षित
b) यह अधिनियम 1921 से लागू हुआ तथा 1937 तक चला था।
c) विधान मंडल की अधिक प्रतिनिधिन बनाया गया।
d) विधान मंडल द्विवसीय (द्विसदनीय) बनाया गया।
निम्न सदन (विधान सभी) उच्च सदन(विधान परिषद)
e) साम्प्रदायिक प्रतिनिधितव का विस्तार।
f) उच्चायुक्त पद का विस्तार।
g) लोक सेवा आयोग की व्सवस्था।

अधिनियम 1935

1) साइमन कमीषन के कई प्रस्ताव स्वीकार किये गये।
2) प्रांतो में द्वैध शासन समाप्त कर दिया गया।
3) केन्द्र में द्वैघ शासन लागू कर दिया गया।
4) शक्ति का विभाजन तीन सूचियों में किया गया
(a).केन्द्रीय सूची (b)राज्य सूची, (c)समवती सूची
5) अवशिष्ट शक्तियों पर जनरल गवर्नर का अधिकार होता था।
6) मानवाधिकार का विस्तार
7) विधानमंडल के सदस्यों का विस्तार किया गया।
8) सम्प्रदायिक निवार्तन का विस्तार।
9) बर्मा को भारत से अलग कर दिया गया।
10) संधीय न्यायालय की स्थापना
11) प्रान्तीय स्वायत्रंता प्रदान की गई जो 1937 ई0 से लागू हुई।

NOTE:- 
a)1935 के अधिनियमको प0 नेहरू ने दासता का चार्टर कहा था।
b) 1935 के अधिनियम की आलोचना करते हुए प0 नेहरू ने कहा था एक कार जिसमें ब्रेक तो है पर इंजन नही।
c) भारत में संधीय न्यायालय की स्थापना की स्थापना 1 अक्टुबर 1937 को भारत सरकार अधिनियम 1935 के अंतर्गत की गयी थी उसके मुख्य न्यायाधीष सर मौरिस ग्लेवर थे।

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947

1) माउंटबेटन योजना के तहत 3 जुन 1947 को भारीयय राष्ट्र को दो राष्ट्र भारत और पाकिस्तान को मान्यता प्रदान की गयी। 4 जुलाई 1947 को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम प्रस्तावित हुआ जो 18 जुलाई को स्वीकृत हुआ। जिसके प्रमुख प्रावधान निम्न प्रकार –
2) 14, 15 अगस्त 1947 की मध्य रात्रि भारत और पाकिस्तान आजाद।
3) बेटन योजना का उददेष्य प्रथम भारत का विभाजन तथा द्वितीय सता हस्तान्तरण था।़
4) 14/15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि केन्द्रीय असेम्बली में इकबाल का गीत श्हिस्तास्ता हमाराश् तथा श्जन मन गणश् एम एस सुब्बालक्ष्मी ने गाया था।
5) स्वतंत्रता के समय कांग्रेस के अध्यक्ष जे बी कृपलानी थे।
6) पं0 जवाहर नेहरू के नेतृतव में स्वतंत्रता भारत की प्रथम सरकार का गठन हुआ और स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि मंत्री डाॅ0 भीमराव अम्बेडकर को बनाया गया।
NOTE:-.
a) के एम पणिकर ने कहा था कि श्ब्रिटिष शासन की सबसे बडी उपलब्धि भारत का एकीकरणश् था।
b) भारत के विभाजन की बाल्कन प्लान माउण्टबेटस के दिमाग की उपज थी।
c) 15 अगस्त 1947 तथा 26 जनवरी 1950 के मध्यभारत ब्रिटिष का एक अधिराज्य था। क्यो कि भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ जिसके उपरांत पूर्ण राज्य के रूप में आया।
d) 15 अगस्त 1947 के दिन गांधी जी कलकत्ता मे मौन व्रत पर थें
e) 14 जून 1947 को कांग्रेस के दिल्ली अधिवेषन में भारत के विभाजन का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। इस अधिवेषन की अध्यक्षता जे बी कृपालानी द्वारा किया गया था।

संविधान सभा का गठन

1) 15 मार्च 1946 के इंगलैण्ड के प्रधानमंत्री क्लीमेन्ट एटली ने घोषणा की कि ब्रिटिष सरकार ने भारतीय को स्वतंत्रता प्रदान करने का निर्णय लिया है। 
2) इसी योजना के तहत 24 मार्च 1946 को कैबिनेट मिषन (लारेन्स, क्रिप्स तथा एलेक्जेण्डर जिसमे लारेन्स अध्यक्ष थे) भारत आया।
3) उसने 1945 में प्रांतीय विधान सभाओ में निर्वाचित प्रतिनिधियों का उपयोग संविधान निर्माण करने के लिए व्यावहारिक समाधान निकालने की कोषिष की गयी जो निम्न प्रकार है –
4) 10 लाख की जनसंख्य पर एक प्रतिनिधि चुना जाएं इस प्रकार संविधान सभा के सदस्यो का चुनाव जनता द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किया गया। जनता ने प्रांतीय विधायको का चुनाव किया तथा विधायको ने संविधान के सदस्य का चयन किया।
5) प्रत्येक समुदाय के प्रतिनिधित प्रांतीय विधानमंडल में उसे समुदाय के सदस्यों चुने जाते थै।
6) मतदान एकल संक्रमणीय पत्र पद्धति (अनुपातिक प्रतिमिश्रित) द्वारा किया जाना था।
जुलाई 1946 में 296 सदस्यो के लिए
चुनाव हुये जिसमें कांग्रेस को 208 और मुस्लिम लीग को 73 सीट मिली।
6) श्संविधान सभी कांग्रेस थी और कांग्रेस भारत था।श्-. अगस्टिन

7) स्वतंत्र भारत के लिए सविधान के रचना हेतु
श्स्वराज पार्टीश् ने 1934 में सर्वप्रथम प्रस्तुत किया था।

सविधान सभा

संविधान सभा के कुल सदस्य – 389
ब्रिटिष भारत के 11 प्रान्तो से – 292
चार कमिषनर क्षेत्रो से – 4
देषी रियासत – 93

जिसमें – अनुसूचित जातियो की संख्या – 33
अनुसूचित जातियों की संख्या – 26
महिला सदस्यों की संख्या – 10

Note:- बाद में पांच महिलाॅए और सम्मानित हो गयी जो निम्न प्रकार है –
1) विजय लक्ष्मी मण्दित- 17 दिसम्बर 1946 को उत्तर प्रदेष (यूनाइटेड प्रोविसेज)
2) राजकुमारी श्रामृत कौर – 21 दिसम्बर 1946 को सेंट्रल प्रोविंसेज
3) रेनक राय- 14 जुलाई 1947 को पं0 बंगाल
4) बेगम एजाइज रसूल – 14 जुलाई 1947 को युनाईटेउ प्रोविसेज
6) अन्नी मसकारने – 29 दिसम्बर 1948 ट्रावनको एवं कोर्चान से।

संविधान निमात्री समितिया और उसके अध्यक्ष

1) प्रारूप समिति – डाॅ. भीमराव अम्बेडकर
2) संविधान सभाके अस्थायी अध्यक्ष – डाॅ0 सच्चिदानंद सिन्हा
3) नियम समिति – डाॅ0 राजेन्द्र प्रसाद
4) संविधान सभा के अस्थायी अध्यक्ष – डाॅ0 राजेन्द्र प्रसाद
5) संचालन समिति – डाॅ0 राजेन्द्र प्रसाद
6) देषी रियासत समिति – डाॅ0 राजेन्द्र प्रसाद
7) संध सविधान नीति समिति – पं0 जवाहर लाल नेहरू
8) प्रांतीय संविधान समिति – सरदार वल्लभ भाई पटेल
9) अल्पसंख्यक परामर्ष समिति – सरदार पटेल
10) मूल अधिकार समिति – सरदार पटेल

संविधान सभा का वाचन

1. प्रथम – 4 नवम्बर 1948 – 9 नवम्बर 1948
2. द्वितीय – 15 नवम्बर 1948 – 17 अक्टुबर 1949
3. तृतीय – 17 नवम्बर 1949 से 26 नवम्बर 1949

प्रारूप समिति के सदस्य
1. डाॅ0 भीमराव अम्बेडकर (अध्यक्ष)
2. गोपाल स्वामी अययर
3. कृष्णा स्वामी अययर
4. के0एम0मुंषी
5. सैयद मुहममद सादृल्ला
6. एन माधवराव (बी0एल0/मित्र के स्थान पर)
7. डी0 पी खेतान (खेतान के मृत्यु के बाद टी0टी0कृष्णाचारी)

 Note:- संविधान सभा का चुनाव जुलाई 1946 में कया गया था।

डाॅ0 अम्बेडकर का चुनाव भारत के बगाल प्रांत के पूर्वी भाग से हुआ किन्तु यह क्षेत्र पाकिस्तान में चला गया तथा पुन कांग्रेसी विजयी प्रत्यासी एम0आर0 जयकार ने पूना (बम्बइ्र प्रेसीडेन्सी) से इस्तीफा देने (गांॅधी जी के प्रयास से) तथा उस स्थान पर उप चुनाव कराकर डाॅ0 अम्बेडकर को लाया गया।

भारतीय संविधान के स्त्रोत

ब्रिटेन
संसदीय प्रणाली
संसदीय विषेषाधिकार
विधि का षासन
संसद तथा विधानमंडल
यु एस ए
सर्वोच्च न्यायालय का संगठन
प्रस्तावना का विचार
विधि का सम्मान संरक्षण
उपराष्ट्रपति का पद
मौलिक अधिकार

आयर लैण्ड
राष्ट्रपति का निर्वाचन
राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा में 12 सदस्यो का मनोनयन
राज्य के नीति निदेषक तत्व
कनाडा
संधात्मक शासन व्यवस्था
अवषिष्ट शक्तिया

समवती सूची – आस्ट्रेलिया
आयात उपबंध – जर्मनी
संविधान संषोधन – द0 अफ्रीका
गणतंत्र – फ्रांस
विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया – जापान
प्रास्तावना की भाषा – आस्ट्रेलिया
मूलकर्तव्य- सोविसत (सोवियत) संध
तीन सूचियों की व्यवस्था (केन्द राज्य व समवर्ती सूची) 1935 के अधिनियम से लिया गया है।

महत्तवपूर्ण तथ्य


1) भारतीय सविधान सर्वाधिक ऋणी 1935 के अधिनियम का है।
2)आयरलैण्ड ने नीति निर्देषक तत्व स्पेन लिया था।
3) भारतीय सविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ उल्लेख अनु. 394 में किया गया है संविधान के अनु. 5, 6, 7, 8, 9, 60, 324, 366, 367, 379, 380, 388, 391, 392, और 393 तुरंत अर्थात 26 नंवबर 1949 को लागू हो गए।
4) शेष अनु 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।
5) भारतीय सविधान 26 नवबंर 1949 को अंगीकृत अपनाया (।कवचजमक) गया।
6) स्ंविधान 26 जनवरी 1950 को लागू (प्उचसपउमदज) हुआ।
7) भारत का सर्वोच्च विधि भारत का सविधान हे।
8) भारत का सविधान 26 जनवरी को लागू किये जाने के पीछे कारण यह था कि काग्रेंस 19 29 के लाहौर अधिवेषन में निण्रय लिया गया था कि आगामी प्रत्येक 26 जनवरी स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जायेगा इस प्रकार स्वतंत्रता दिवस 26 जनवरी 1930 को मनाया गया।
Notes:- लाल किले पर ध्वजारोहन 26 जनवरी को राष्ट्रपति तथा 15 अगस्त को प्रधानमंत्री द्वारा किया जाता है।

 

भारतीय सविधान की विषेषताए विश्व का सबसे विषालतम सविधान
शक्तियों का विभाजन –

1. केन्द्र सूचीए
2. राज्य सूची
3. समवती सूची
प्रशासनिक क्रियाकलाप का उल्लेख
लिखित संविधान (संविधान की सवो्रच्चता)
कठोर व नम्य का समन्वय
स्वतंत्र न्यायपालिका
मौलिक अधिकार
नीति निदेषक तत्व
मूलकत्र्तव्य
प्रस्तावना उददेष्य
संसदात्मक शासन व्यवस्था
सामम्य रिस्थितियों में संधात्मक किन्तु विषेष परिस्थितियों में एकात्मक शासन व्सवस्था।
लोक सम्प्रभुता पर आधारित संविधान
सम्प्रभुता सम्पन्न लोकतांत्रित गणराजय
समाजवादी राज्य
धर्म निरपेक्ष राजय (पंधनिरपेक्ष राज्य)
विधि के शासन के स्थापना।
कठोरता और लचीलेपेन का समन्वय
साम्प्रदायिक प्रतिनिधितव का अंत और व्यस्क मताधिकार प्रा0
पिछले वर्गो तथा अल्पसंख्यक वर्णो का कल्याण।
सामाजिक समानता की स्थापना।
शक्तिषाली केन्द्र की स्थापना।
एकहरी नागरिकता इत्यादि।

 

महत्तवपूर्ण तथ्य

भारतीय सविधान में भारत के दो नाम है – प्दकपं जींज पे ठींतंज
भारतीय सविधान मंे संध ;थ्मकवदंसद्ध शब्द का उल्लेख नही है।
भारत राज्यो का संध ;न्दपवद व िजीम ेजंजमद्ध है। अनु0 01
16 वें स0सं0 1963 द्वारा कोई राज्य भारत से पृथम नही हो सकता है।
लिखित सविधान की अवधारना सर्व प्रथम यु एस ए मंे हुई।
भारतीय राजनीतिक व्यवस्था का स्वथ्य गणतंत्रीय संधीय और संसदीय है।
ब्रिटेन का संविधान आलिखित और विकसित संविधान है।
श्टाकविलेश् का कथन है ब्रिेटेन संविधान आ आस्तिव नही है।
भारतीय संविधान का स्वरूप संरचना में संधात्म्क तथा भावना में एकात्म्क हैं।
भारत में सविधान की सर्वोच्चता स्थापित की गयी।

 

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