गरीबी 

सापेक्ष गरीबी

a) लारेंज वक्र
b) गिनी गुणांक
 Note:-
c) विष्व बैंक के अनुसार 13258 से कम प्रति व्यक्ति आय है।
d) अपने आय से जो व्यक्ति अपने आवष्यकता की वस्तुएॅ न खरीद पाता हो निरपेक्ष गरीबी कहलाता है।
e) प्रो. लकडवाला: ने 1998 में कहा कि गरीबी मापन की सुचि अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग होता है। इसलिए प्रत्येक क्षेत्र की अलग-अलग सुची  बनाई जानी चाहिए।

CPIAL = 2400

CPIIW = 2100

सार्वधिक गरीबी की संख्या  उत्तर प्रदेष (5.90 करोड़) परन्तु: 32%
उडीसा में गरीबी: 46%
जीवन की आधारभूत आवष्यकताओं के वंचन से गरीबी का अवष्य लगाया जाता है। गरीबी के मापन के दो तरीके है।
(1) सापेक्ष गरीबी (2) निरपेक्ष गरीबी

सापेक्ष गरीबी:-

 सम्पूर्ण विष्व में पायी जाती है इसका मापन सम्पत्ति धारण की क्षमता से लिया जाता है। इसमें तुलनात्मक रूप से सह देखा जाता है कि किस व्यक्ति के पास अन्य की तुलना में कितनी सम्पत्ति है इसे मापने के लिए लारेंज वक्र तक मिनी गुणांक का प्रयोग किया जाता है।

निरपेक्ष गरीबी:-

 गरीबी का वास्तविक आष्य निरपेक्ष गरीबी से लगाया जाता है। एक व्यक्ति निरपेक्ष गरीबी तब कहलायेगा ज बवह अपनी वर्तमान आय के माध्यम से मूल भूत आवष्यकताओं को पूरी न कर पाता हो। इसे मापने के लिए भारत के नोबल पुरस्तकार विजेता अर्थषास्त्री प्रो. अमत्र्य सेन (1998) ने Head Court Ratio  जैसी विवि का प्रयोग करते है। इनका मानना है कि जो व्यक्ति गरीबी रेखा से जितना ही नीचे होगा उतना ही ज्यादा गरीब होगा। अर्थात गरीबी रेखा के नीचे गरीबी का धनत्व बढ़ता जाता है।

भारत में गरीबी का आकलन योजना आयोग द्वारा किया जाता है और इससे सम्बन्धित आकडांेNSSO का प्रकाषन छैैव् राष्ट्रीय प्रतिदर्ष संगठन सर्वे संगठन द्वारा किया जाता है योजना आयोग ने 1969-65 में प्रति व्यक्ति 20 रूपया मासिक को गरीबी हेतु आधार बनाया जिसकी काफी आलोचना की गई और इसे संसोधित करके ग्रामीण और संसोधित क्षेत्र के लिए 20 व 25 रू. निर्धारित किया गया। 1977 में न्यूनतम आवष्यकता तथा प्रभावपूर्ण मांग की कार्यदल (task force) वितबमद्ध कैलोरी को गरीबी का मापक बनाया गया। 2100 कैलोरी शहरी क्षेत्रों के लिए तथा 2400 कैलोरी ग्रामीण क्षेत्रों के लिए निष्चित किया गया।

ठसमें पुनः संसोधन करके 1989 मंे प्रो. लकडावाला के द्वारा बनाया गया सुचकांक गरीब के मापन के लिए प्रयोग किया जाता है। कैलोरी की क्षतिपूर्ति अब अलग-अलग राज्यों में कृषि श्रमिकों के लिए CPIAL(Consumer Price Index Agriculture Labour) ।तथा औद्योगिक रमिकों के लिए CPIAL का प्रयोग किया जाता है। इस पद्धति को आठवीं पंचवर्षीय योजना में लागू किया गया। वर्तमान में भी यही चल रही है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों हेतु 356 रू. मासिक तथा शहरी क्षेत्रों 538 रू. मासिक कैलोरी निष्चित किया गया है।

विश्व बैंक तथा अन्य संगठन गरीबी मापन हेतु अलग-अलग धनराषि को पैमाना बनाए है। विष्व बैंक के अनुसार जो व्यक्ति 1ण्25$ या इससे कम प्रतिदिन कमा रहा हो वह गरीब कहलाएगा।

एष्यिन Development Bank 35 $ तथा तथा भारत सरकार 1.25 $ को गरीबी रेखा का मापक मानते है।

भारत में गरीबी के मापन के लिए दो पद्धतिया पाई जाती हैं –


(1½ URP: (Unifor Recall Period) यह 30 दिवसीय अवधि पर आधारित होता है।
NSSO के 61 वें चक्र के अनुसार URP के आधार पर सम्पूर्ण भारत में 2004-05 की अवधि में 27.25 प्रतिषत की गरीबी पाई गयी है। ग्रामीण क्षेत्रों में 28.30 प्रतिषत तथा शहरी क्षेत्रों में 25.7 प्रतिषत की गरीबी पाई जाती है

 

  MRP (Minimum Recall Period) रू यह 365 दिनों (1 साल) पर आधारित होती है। इसमें 5 गैर खाद्या वस्तुओं को शामिल किया जाता है। गैर खाद्य वस्तुओं मे 1) वस्त, 2) जूता, चप्पल, 3) मकान, 4) षिक्षा, 5) संस्थागत चिकित्सा। डत्च् के आधार पर 2004-05 की अवधि मे सम्पूर्ण भारत में 21.8 प्रतिषत की गरीबी पाई गयी।

सर्वाधिक गरीबी के प्रतिषत वाले राज्य

(1) उडीसा – 46.4 प्रतिषत सर्वाधिक
(2) बिहार – 41.4 प्रतिषत
(3) छत्तीसगढ – 40.9 प्रतिषत
(4) झारखंड – 40.3 प्रतिषत
उत्तर प्रदेष में गरीबी का प्रतिषत, 32.8 प्रतिषत है।

नोट:- सर्वाधिक गरीबी की संख्या (5.40 करोड) उत्तर प्रदेष में है।
महत्वपूर्ण: मार्च 2009 में प्रकाषित प्रो. सुरेष तेन्तुलकर की रिपोर्ट ने गरीबी के संबंध में जो आंकडे दिए है वो आंकड़ों से काफी अलग है। इन्होंने गरींबी के मापन के डत्च् पद्धति को अपनाया है जिसके अनुसार सम्पूर्ण भारत में 37.2 प्रतिषत की गरीबी पाई जाती है।

भारत में सम्पूर्ण स्तर पर गरीबी के संबंध में कुछ अनुमान
योजना आयोग का अनुमान (2005)

2004-05 मूल्य पर – 27.5 प्रतिषत
ग्रामीण क्षेत्र 28.3 प्रतिषत
शहर 25.7 प्रतिषत
अर्जुन सेन गुप्ता पैनल
2004-05 मूल्य पर – 77 प्रतिषत
प्रतिदिन 20 रूपया
एन.सी. सक्सेना कमेटी (2009)
ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा नियुक्त – 50 प्रतिषत
विश्व बैंक (2009 रिपोर्ट)
1.25 डालर प्रतिदिन 2005 में 41.6 प्रतिषत
सुरेष डी तेन्तुलकर (2009)
2004-05 मूल्य पर 37.2 प्रतिषत
ग्रामीण 41.8
शहरी 25.7

उल्लेखनीय है कि तेन्दुलकर कमेटी ने 2004-05 मूल्य पर ग्र्र्र्रामीण व्यय को 446.68 रू. शहरी व्यय को 78.80 प्रतिमाह मानते हुए ग्रामीण क्षेत्र के लिए 41.8 प्रतिषत तथा शहरी क्षेत्र के लिए 25.7 प्रतिषत का अनुमान दिया। विषेषज्ञ यह मानते है कि तेन्दुलकर का व्ययसम्बंधी अनुमान लकडावाला अनुमान से अधिक पर सेनगुप्ता के अनुमान से कम है।

एच.डी.आर (2010) HDR
बहुआयामी गरीबी सूचकांक  पर आधारित

 

बहु आयामी गरीबी सूचकांक

(Multidimensional Poverty Index½
वर्ष 2010 से साक्षरता और आय पर इनके संकेतको को नया रूप दिया गया है जिसके तहत सकल नामाकंन दर एवं वयस्क साक्षरता दर को क्रमषः स्कूलविधि के अनुमानित वर्षे  एवं स्कूलावधि के औसत वर्ष  से प्रतिस्थापित किया गया है और ‘सकल घरेलु उत्पाद‘ का स्थान सकल राष्ट्रीय आय (National Income) ने लिया है जिसमें अन्तर्राष्ट्रीय आय प्रवाह को भी शामिल किया जाता है।
यूएनडीपी ने वर्ष 2010 से मानव विकास सूचकांक तैयार करने के लिए जिस बहुआयामी निर्धनता सूचकांक का इस्तेमाल किया है, उनके अतंर्गत एक ही परिवार के सदस्यों में पाए जाने वाले , स्वास्थ्य और जीवन स्तर से संबंधित अभावों पर ध्यान दिया गया है। अर्थात भारत में गरीबी रेखा से उपर के लोगो में षिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन दषाओं से संबंधित अभाव पाये जाते है। 

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