सिंधु घाटी सभ्यता :-

हडप्पा सभ्यता:-

1) 1921 में दयाराम साहनी द्वारा खोज की गयी।
2) वर्तमान शोधो के आधार पर इसे 3500 ई0पू0 की सभ्यता माना गया है।
3) भारतीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग का जन्मदाता अलेक्जेन्डर कनिंघम
4) भारतीय पुरातत्व विभाग की नीव वायसराय लार्ड कर्जन के काल पडी।
5)राखलदास बर्नजी ने 1922 में मोहनजोदडो की खोज की।
6) हडप्पा सभ्यता के विभिन्न नाम
a) हडप्पा सभ्यता
b) सिंधु घाटी सभ्यता
c) सिंधु सरस्वती सभ्यता
d) कांस्य युगीन सभ्यता
e) प्रथम नगरीय क्रांति
काल निर्धारण – इस सभ्यता की लिपि पडी ना जा सकने के कारण कालक्रम निर्धारण एक जटिल कार्य है।
रेडियो कार्बन विधि
3500 बी सी – 1300 बी सी:- पूर्व हडापाई काल -3500-2600 बी सी, परिपक्व हडपाई काल -2600 -1900 बी सी, उत्तर हडपाई काल-1900-1300 बी सी
सर मार्टिनर व्हीलर – 2500 बी सी – 1500 बी सी
डी पी अग्रवाल – 3250 बी सी – 2750 बी सी
मैक – 2800 बी सी – 2500 बी सी
एम एम वत्स – 3500 बी सी – 2500 बी सी
डेल्स – 2900 बी सी – 1900 बी सी

सिन्धु सभ्यता की मानवप्रजातिया

1. प्रोटोआस्ट्रेलायड: यह सिन्धु क्षेत्र मेें आने वाली प्रथम जनजाति थी अभी भी ैब्ध्ैज् के रूप में भारत में विद्यमान है।
2. भुमध्यसागरीय (मेडिटेरियन) – सिंधु सभ्यता की निर्माता प्रजाती, चटगांव का पहाडी क्षेत्र में पाये जाते है।
3. अल्पाइन: विषेषकर सिन्धु प्रदेष, गुजरात, महराष्ट्र, कर्नाटक एवं तमिलनाडु में।

उदभव –

विदेषी उदभव का मत – मेसोपोटानिया की सुमेरियन सभ्यता से हडप्पा सभ्यता का विकास का मत।
सर्मथक के्रमर, गार्डन चाईल्ड, एच डी साॅकलिया

स्वदेषी उदभव का मत: सिन्धु सभ्यता का उद्भव ईरानी बलूच और सिंधु संस्कृतियों (आमरी कोटिदीजी) तथा भारत की स्थानीय संस्कृतियों से हुआ।
सर्मथक: फेयर सर्विस, अमलानंद घोष (सोथी संस्कृति), डी पी अग्रवाल और अलिचन(दोनो ने सोधी संस्कृति कोही उद्भव स्त्रोत माना)
(a) प्राक हडप्पा स्थल: स्थल जो हडप्पा सभ्यता के उद्भव से पूर्व से मौजूद थे।
दक्षिणी अफगानिस्थान – मुंडीगाक, देह मोरासी घुंडई
बलुचिस्तान (पाकिस्तान) – नाल, किले गुलमोहम्मद, दम्बसदात, पेरियानों धुंडई, अंजीरा, स्याहदम्ब, नून्दरा, कुल्ली, मेही, पीराक, दम्ब, मेहरगढ।
सिन्धप्रान्त – आमरी कोटिदीजी
पंजाब प्रंात (पाकिस्तान): हडप्पा, सरायखोला, जलीलपुर।
राजस्थान – कालीबंगा
हरियाणा – राखीगढी, बनावली
(b) हडप्पन स्थल: अफगानिस्ताान – मुण्डीगाक, शुर्तुगुई

पाकिस्तान –

दक्षिण बलूस्तिान – सुल्फागेण्डोर, सोल्काकोह, डाबरकोट, बालाकोट
सिन्द प्रांत – मोहनजोदडों, चन्दूदडों, जुडेरजोदडी, आमरी, कोटिदीजी, अलीमुराद।
पंजाब प्रांत – हडप्पा, डेरा इस्मालइखान, जलीलपुर, रहमान, ढेरी गूमला

भारत
जम्मू कष्मीर – माण्डा
पंजाब – रोपण, कोटलनिहंग खान
चक – 86 बाडा संधोल डेरमजरा
हरियाणा – बनावली, मिताथल, सिसवल, बखावली, राखीगढी, बालू
राजस्थान – कालीबंगा
उत्तरप्रदेष – आलमगीरपुर (मेरठ) बडागांव एवं हुलास (सहारनपुर)।
गुजरात – कच्छ की खाडी – देषलपुर, सुरकोरदा, धौलावीरा।
खम्भात की खाडी – लोथल, रंगपुर, रोजदी, प्रभास, भगतराव, नागेष्वर, कुन्नासी, मेद्यम, षिकारपुर
महाराष्ट्र – दैमाबाद (अहमदनगर जिला , गोदावरी तट पर स्थित) माण्डा (जम्मू कष्मीर)
हडप्पोत्तर स्थल – रोजदी एवं रंगपुर।
तीनो कालो के स्थल – सुरकोटदा, घौलावीरा, राखीगढी, मांडा।

महत्तवपूर्ण तथ्य:-

1) सिंधु सभ्यता के अधिकांष निवासी भूमध्य सागरीय प्रजाति के थे।
2) सिंधु सभ्यता के लोग लौह धातु से अपरिचित थे।
3) उत्खनन के आधार पर सैन्धव कालीन सभ्यता की तिथि 2500 बी सी निर्धारित की गयी
4) सिंधु सभ्यता के लोग पषुपति की पूजा करते थे।
5) सिंधु सभ्यता के पतन का प्रमुख कारण विनाषकारी बाड था।
6) सिंधु सभ्यता एक नगरीय सभ्यता थी।
7) मोहनजोदडों का प्रमुख सार्वजनित स्थल स्नानागार था।
8) सिंधु सभ्यता मातृ प्रधान थी।
9) सिंधु स्थल लोथल गुजरात में स्थित है।
10) मोहनजोदडों के उत्खनन से आर डी बर्नजी सम्बन्धित है।
11) सिंधु सभ्यता के व्यापारिक सम्बन्ध सुमेर ईरान बहरीन से थे।
12) स्वतंत्रता प्राप्ति के पष्चात सबसे अधिक सैन्धव सभ्यता के स्थल गुजरात से खोजे गये।
13) मिस्त्र सुमेर एवं मेसाोपोटामिया की सभ्यताएॅं सैन्धव सभ्यता की समकालीन थी।
14) मार्टिनर व्हीलर ने मद दिया कि सैंधव सभ्यता का विनास आक्रमणकारी आर्यो ने किया।
15) सिंधु सभ्यता मानव इतिहास के आद्य एैतिहासिक काल से सम्बन्धित है।
16) प्रसिद्ध कास्य नर्तकी की मूर्ति (मोहनजोदडो) से प्राप्त हुयी थी।
17) घोडे के अवषेष सुर कोटदा कच्छ की खाडी से प्राप्त हुए है।
18) सिंधु सभ्यता के मुहरो पर गाय, उठ, घोडा आदि पषुओं का अंकन नही मिलता है।
19) चारागाही अर्थव्यवस्था सिंधु सभ्यता की विषेषता नही थी।
20) मोहनजोदडों में आवास ईटो से बने हुए थे।
21) सिंधु घाटी की लिपि की सूचना मोहरों से प्राप्त होती है।
22) सिंधु घाटी सभ्यता का सर्वाधिक उपयुक्त नाम हडप्पा सभ्यता होना चाहिए।
23) कालीबंगा से जुते हुए खेत के साक्ष्य प्राप्त हुए है।
24) सिंधु लिपि को बांए से दाए पढने और उसे तमिल भाषा में परिवर्तित करने वाले विद्वान रेवरैण्ड हैरस थे।
25) सिंधु व सुमेरियन सभ्यता अन्न भंडार प्रणाली में समान थी।
26) धर्म वर्तमान भारतीय जीवन का वह क्षेत्र है जो आज भी सिंधु सभ्यता से प्रेरणा ले रहा है।
27) युगल शसाधान के साक्षय लोथल से मिले है।
28) सिंधु सभ्यता से सुती वस्त के उल्लेख मिले है।
29) लोथल जो सिंधु सभ्यता का प्रमुख पल्वन नगर था खम्भात की खाडी में स्थित था।
30) मोहनजोदडों की इमारते नगर के सम्पूर्ण क्षेत्र में नियोजित ढंग से फैली थी
31) प्रसिद्ध पषुपति मुहर मोहनजोदडों से प्रात हुयी है।
32)हडप्पा में ईटों के नाप का अनुपात 1ः2ः4 था।
33) सिंधु सभ्यता से प्राप्त मुहरें स्टेटाइट की बनी थी।
34) कालीबंगा से अग्नि वेदिकाओं के प्रमाण मिले है।
35) मण्डा (जम्मू-कष्मीर) चिनाव नदी पर स्थित है।
36) मोहनजोदडों से सूती कपउे का टुकडा प्राप्त हुआ था।
37) प्रारम्भिक हडप्पा स्तरों से कालीबंगा मे एक खेत में साथ साथ दो फसलो के उगाने का साक्ष्य प्राप्त होता है।
38) भारत में मूर्तिपूजा का प्रारम्भ हडप्पा काल से प्रारम्भ होता है।
39) कालीबंगन में दुर्ग तथा निचला नगर अलग अलग प्राचीरों से घिरे हुए है।
40) हडप्पा मोहनजोदडो तथा कालीबंगा में दुर्ग नरग के पष्चिम में स्थित है।
41) गुजरात के हडप्पाकालीन पुरास्थलों से धान की खेती के प्रमाण मिले है।
42) सिंधु व्यापारिक केन्द्रों से मेसोपोटामिघा के साथ व्यापार टिलमुन नामक मध्यस्थ बंदरगाह से होता था।
43) चाल्र्स मैसन ने सर्वप्रथम हडप्पा के विषाल टीलों की ओर ध्यान आकृष्ट किया था।

सिंधु सभ्यता के पतन के मत विद्वान

सिन्धु नदी की बाढ मार्षल एवं मैके
बाहय आक्रमण गार्डन चाइल्ड एवं मार्टिम व्हीलर
जलवायु परिवर्तन आरेल स्टीन
भूतात्विक परिवर्तन राइक्स एवं डेल्स
a) मुहरों के अतिरिक्त हडप्पा सभ्यता की लिपि के नमूने मृदभाण्डों पर प्राप्त हुए है।
b) सिंधु सभ्यता में अन्नागार दो मंजिला भवन एवं स्नानागर प्राप्त हुए।
c) सिंधु सभ्यता का तिथिक्रम सर्वप्रथम मेसोपोटामिया के अवषेषो के सापेक्ष कालक्रम से निर्धारित किया गया।
d) सिध्ंाु सभ्यता के मापक 16 गुणज भार के है।
e) अन्नागार मोहनजोदडों की सबसे बडी इमारत थी।
f) हडप्पा मोहनजोदडों का हास 2000 बी सी प्रारम्भ हुआ।
g) सिंधु सभ्यता के लो अष्व से परिचित नही थे।
h) हडप्पा संस्कृति के स्थलो का सर्वाधिक संके्रदन छग्गर हाकरा नदियों के किनारे प्राप्त हुआ है।
i) हडप्पीय फसलों में से गेहुॅ, जौ, चावल का प्रसार पष्चिम एषिया से माना जाता है।

हडप्पा संस्कृति के स्थानों से प्राप्त वस्तुए सम्भव स्त्रोत:-

तांबा राजस्थान
शंख कच्छ
लाजवर्द मणि अफगानिस्थान
स्वर्ण ढक्कन
1) मृत्तिका पात्र के साथ शरीर का विस्तारित शवाधान हडप्पा संस्कृति में प्रमुख अन्त्योष्टि प्रथा थी।
2) पषुपति मुद्रा पर अंकित पषु व्याघ्र, हाथी, गैडा और भैसा है।
3) सुमेलन: यगल शवाधान – लोथल
अग्निवेदियाॅ – कालीबंगा
कर्मकारों के निवास – हडप्पा
मनकाकारी – चन्दहूदडों
4) हडप्पावासियांे द्वारा निर्मित मृण्मूर्तियों के प्रमुख विषय खिलौने, पूर्जापित पषु एवं मानव आकृतियाॅ थे।
5) ताम्र मूर्तियों एक निधान, जिसे प्रायः हडप्पा संस्कृति काल से सम्बंद्ध किया जाता है, दैमाबाद से प्राप्त हुआ था।
6) देसलपुर एवं सुरकोटदा कच्छ प्रदेष मे स्थित है।
7) लोथल से फारस की खाडी की मुद्रा प्राप्त हुयी है।
8) आमरी संस्कृति सिंध क्षेत्र में पनपी।
9) धान की भूसी के साक्ष्य रंगपुर (खम्भात की खाडी) से प्राप्त हुए।
10) काली लकडी, हाथी दांत, एवं सोना का निर्यात् मेहुला से होता था।
11) मोहनजोदडों नगर सर्वाधिक क्षेत्रफल में विस्तृत था।
12) हडप्पीय सीलो का चैकोर आकार सर्वाधिक प्रचालित था।
13) पकी मिटटी के बने हल का प्रतिरूप् बनावली से प्राप्त हुआ है।
14) हडप्पा वासियों का विनाष आर्यो ने किया, इस मत के सर्मथन में कोई भी पुरातात्विक साक्ष्य नही मिलता।
15) हडप्पाकाल का एक कांसे का रथ जिसने बैल जुते है और इसे एक नग्न मानव चला रहा है, दैमाबाद (महाराष्ट्र) से प्राप्त हुआ था।
16) लोथल की खुदाई से एक अत्यंत उन्नत जल प्रबंधन व्यवस्था प्राप्त हुयी थी।
17) हडप्पाकालीन लिपि वर्णानुक्रमिक नही है, बल्कि मुख्यतः चित्रालिपि है।
18) तांबे की एक मानव आकृति हडप्पा से प्राप्त हुयी है।
19) आई महादेवन ने सिंधु लिपि के उद्वाचन पर काम किया है।
20) हडप्पा से कब्रिस्तान एच संस्कृति के साथ्य मिले है।
21)हडप्पा से प्राप्त अन्नागार रावी नदी केन्किट स्थित था।
22) लोथल से एक भाण्ड प्राप्त हुआ जिस पर पंचपंत्र की चालाक लोमठी के सादृष्य दुष्य अंकित था।
23) नगर, कटपलों ढाढरी तथा भगवानपुरी से प्राप्त पुरातात्विक साक्ष्य इंगित करते है कि परवर्ती हडप्पा सभ्यता के लोग एवं चित्रित धूसर भंड प्रयोग करने वाले लोग संपर्क मे तो आए परंतु एक ही क्षेत्र में अलग अलग बस्तियों मे रहें।
24) हडप्पा सभ्यता में सर्वाधिक बाढ का सामना मोहनजोदडों की करना पडा खुदाई में इसे सात स्तर प्राप्त हुए है।
25) सिंधु लिपि दाए से बाये की ओर है लेकिन कुछ में दाए से बाए और फिर बाए से दाए की ओर है, इसे बूस्ट्रोफेडन कहते है।
26) थौलावीरा भारत में खोजा गया सबसे बडा सैंधव स्थल है।
27) वर्तमान मे जो ज्ञात सैंधव स्थलों की अनुमानित संख्या 1500 है।
28) रावीगढी भारत में खोजा गया दूसरा सबसे बडा सैंधव पुरास्थल है।
29) मोहनजोदडो से प्राप्त पुजारी का सिर मंगोलायड प्रजाति का है।
30) मोहनजोदडों से प्राप्त नर्तकी की मूर्मि आध आस्ट्रेलायड प्रजाति की है।
31) सिंधु सभ्यता को सरस्वती सभ्यता भी कहा जाता है, क्योकि इस सभ्यता के 80 प्रतिषत स्थल सरस्वती नदी के आस पास स्थित थे
32) भारत मंे चांदी की उपलब्धता के प्राचीनतम साक्ष्य हडप संस्कृति से मिले है।
33) ब्राहई बलूस्तिान की भाषा है, किन्तु शास्त्रीय दृष्टि से यह द्रविण परिवार की भाषा है।
34) आधुनिक देव नागरी लिपि का प्राचीन रूप ब्राहनी है।
35) नौसारों पुरास्थल स सिंदुर के प्रमाण प्राप्त हुए है।
36) लोथल का गोदीबाडा संपूर्ण हडप्पा संस्कृतमाला में निर्मित पकी ईटों का विषालतम संरचना है।
37) हडप्पा संस्कृति से प्राप्त षिव की मुहर पर निरूपति आकृति की पहचान योगमुद्रा में बैठे षिव जिनके चारों ओर पषुओं की आकृतिया अंकित है के रूप में की गयी है।
38) नेग्रीटो नृजातीय तत्व हडप्पा स्थलों के कंकाल अवषेषों से नही मिला हैं।
39) लोथल – गोदीबाडा
40) कालीबंगा – जुता हुआ खेत
41) धौलावीरा – हडप्पन लिपि के बडे आकार के दस चिन्हांे वाला षिलालेख
42) बनावली – पक्की मिटट की बनी हुई हल की प्रतिकृति
43) उत्तर वैदिक काल मे महत्व प्राप्त किए प्रजापति देवता में पूर्ववर्ती देव विष्वकर्मा एवं हिरण्यगर्भ समाहित हो गये।
44) अपने पुरोहित के साथ विदेध माधव के पूर्व को ओर प्रवजन की कथा शतपथ ब्राहमण में वर्णित है।
45) ऋक संहिता में जंगल की देवी अरण्यानी का प्रथम उल्लेख है।
46) ऋग्वेद के सुक्तों में हिमवंत एवं मूजवन्त का उल्लेख किया गया है।
47) ऋग्वेद के सुक्तो में उल्लेखित अधिकांष नंदिया यमुना व गंगा के पष्चिम मे बहती है।
48) गे अपहरण के प्रसंग में ऋग्वेद में प्रमुख रूप से प्राणियों का नाम आता है।
49) वैदिक संस्कृति में बौने का ऋभु कहते थे।
50) उत्तर वैदिक काल के प्रमुख लक्षण जंगलो का व्यापक रूप से जलाया जाना, लौह उपकरणों का निर्माण , एवं . ऋतुओं का ज्ञान है।
51) ऋग्वेद में लोग इन्द्र का आह्वन भौथ्तक सुख एवं विजय के प्रयोजन से करते है।
52) अश्वपति उपनिषदों मंे उल्लिाखित कैकेय जनपद का एक दार्षनिक राजा था।
53) प्राचीन भारतीय धर्म ग्रन्थों में इन्द्र के साथ कृष्ण के विरोध का उल्लेख मिलता है।
54) नीले लेहित जो वैदिक गंथो में उल्लिखित एक प्रका का मृदभाण्ड है, कृष्ण एवं लाभा भाण्ड से अभिन्न माना जा सकता है।
55)वैदिक गं्रथो में खिल्व शब्द उसर भूमि के लिए प्रयुक्त होता था।
56) ऋग्वेद में उल्लिखित यदु एवं तुर्वस दो जन थे।
57) ऋग्वेद में अन्यव्रत शब्द दस्यु के संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है।
58) मैं कवि हॅू, मेरा पिता भिषज है और मेरी माता अन्न पिसनी है। यह अवतरण ऋग्वेद में मिलता है।
59) वैदिक कालीन नादियों के प्राचीन एवं आधुनिक नाम –
सरस्वती – धग्गरदाकरा
शतुद्रि – सतलज
परूष्णी – रावी
विपास – व्यास
60) ऋग्वेद में सम्पत्ति का मुख्य रूप गो धन था।
61) उपनिषद काल में ब्रहमा का आर्विभाव एक परम सत्ता के रूप में हुआ।
62) दसराज युद्ध का प्रमुख कारण पुरोहितों का षडयंत्र था।
63) वैदिक काल में छिज में ब्राहमण क्षत्रिय एवं वैष्य शामिल थे।
64) प्राचीन लौह युगीन बस्तियों से सम्बन्धित मृदभाण्ड चित्रित धूसर मृदभाण्ड थे।
65) वैदिक देवता उनके कार्य
पूषन वनस्पतियों एवं औषधियों के देवता
सविता प्रकाष के देवता
अतिति सर्वषक्तिमान देवी
धौ सूर्य के पिता
66) वैदिक संस्कृति में नप्तृ शब्द चचेरे भाई बहन नाना मामा इत्यादी सम्बन्धितो के लिए प्रयुक्त होता था।
67) विवाह के प्रकार आषय/प्राकृति
ब्रहन विवाह समान वर्ण मेें कन्या का मूल्य चुकाकर
दैव विवाह यज्ञ करने वाले पुरोहित के साथ विवाह
प्रजापत्य विवाह प्रेम विवाह
गान्धर्य विवाह बिना लेन देन के योग्य वर से विवाह
असुर विवाह कन्या के बदले वर से धन प्राप्त करना
(विक्रय विवाह)
68) राजा के निर्वाचन से सम्बन्धित सूक्त ऋग्वेद में पाये जाते है।
69) वृक, लांगल एवं सीर वैदिक शब्दावली में कृषि के उपकरणो के घोतक है।
70) ऋग्वेद के आठवे मंडल की हस्तलिखित ऋचाओं को खिल कहते है।
71) ऋग्वेद के दसवें मंडल में पुरूष सूक्त में ब्राहमण क्षत्रिय वैष्व एवं शूद्र वर्णो का उल्लेख है।
72) यर्जुवेद की दो शाखाये, शुक्ल यर्जुवेद और कृष्ण यजुर्वेद है। शुल्क यर्जुवेद को राजनेयी संहिता भी कहते है।

73) अर्थववेद की रचना चारों वेदों में सबसे अन्त में हुयी थी उसमें 731 सूक्त 20 अध्याय तथा 6000 मंत्र है।
74) अथर्ववेद में परीक्षित को कुरूओं का राजा कहा गया है।
75) छः वेदान्ग – षिक्षा कल्प व्याकरण निरूक्त छंद एवं ज्योतिषी है।
76) सुरा की आहुति सीतामणि का लक्षण है।
77) राज्य के अधिकारी (रलिन) राजसूय यज्ञ से सम्बन्धित होते थे।
78) पुरूषमेध यज्ञ में 25 — के प्रयोग का विधान था।
79) साहित्य में षिव का प्रथम रूप रूद्र मिलता है।
80) यूप याज्ञिक स्तम्भ होते थे।
81) चित्रित धूसर मृतभाण्ड वैदिक काल से सम्बन्धित थे।
82)गीता ग्रन्थ में वर्णव्यवस्था गुणों एवं अभिरूचियो पर आधारित थी।
83) वैदिक ग्रंथो में प्रयुक्त महंत शब्द नैतिक व्यवस्था से सम्बन्धित था।
84) ऋग्वेद में हल से खीची गई रेखा के लिए सीता शब्द का प्रयोग किया गया है।
85) ऋग्वेद का सर्वप्रमुख देवता इन्द्र है।
86) ऋग्वैदिक काल में सर्वप्रथम राज्याभिषेक की परम्परा आरम्भ हुई।
87) उत्तरवैदिक काल में केवल वैष्यो पर कर का भार होता था।
88) विज्ञानेष्वर वह स्मृतिकार थे, जिन्होंने पिता के जीवन काल में ही पुत्रों की बीच सम्पत्ति के विभाजन की अनुमति दी।
89) जनक के दरबार मंे मार्गी ने यज्ञवलक्य को चुनौती दी थी।
90) वैदिक काल में रत्निन राजकीय सेवारत कुलीन व्यक्ति होते थे, जो रत्न धारण करना पंसद करते थे।

यर्जुवेद गद्य एवं पद्य दोनों में रचित है

1) ऋग्वेद मंे कुल 10 मंडल 1028 सूक्ति एवं 10462 ऋचाये है, तथा इसे पढने वाले को हेता कहते है।
2) वैदिक काल में इन्द्र के बाद दूसरे प्रमुख देवता अग्नि थे।
3) ऋग्वेद के केषिन सूक्त में समाज के चतुर्विध वर्गीकरण का विचार प्राप्त होता है।
4) सोम पेय का संबंध अग्निष्टोम नामक वैदिक यज्ञ से था।
5) वैदिक देवता वरूण नैतिक अवस्था के सरक्षंक थे जे पापिओं को दंड देते थे।
6) वैदिक सभी एवं समिति को वैदिक देवता प्रजापति की दो पुत्रिओं अधर्ववेद मे कहा गया है।
7) सामवेद के दो उपनिषद दान्दोग्य एवं जैमनीय है तथा इसका एक ब्राम्हण पंचविष (नाट्य ब्राहम्ण) है।
8) यर्जुवेद का पाठन करने वाला एवं यज्ञ कराने वाले पुरोधित को अध्वर्यु कहते है।
9) नचिकेता और यम के बीच सुप्रसिद्ध संवाद कठोपनिष्पदन है।
10) प्राचीन भारत के विष्वोत्पत्ति विषयक धारणाओं के अनुसार चारों युग का क्रम – कृत त्रेता, द्वापर, कलि है।
11) व्रहनवादिनी लोपमुद्रा ने कुछ वैदिक मंत्रो की रचना की।
12) आरम्भिक वैदिक साहित्य में सर्वाधिक वर्णित नदी सिंधु नदी है।
13) आर्य भारत के ही मूल निवासी थे इसका सबसे बडा प्रमाण है कि 5000 बी सी से 800 बी सी के बीच किसी नये जनसमुदाय का साक्ष्य नही मिलता है।
14) वैदिक काल में निष्फ शब्द का प्रयोग एक आभूषण के लिये हेाता था, किन्तु परवर्ती काल में उसका प्रयोग सिक्के के लिए हुआ।
15) मूर्तिपूजा का आरम्भ पूर्व आर्य काल से माना जाता है।
16) आयूर्वेद अर्थात जीवन का विज्ञान का उल्लेख अथर्ववेद में मिला है।
17) वैदिक समाज में नियोग शब्द का अर्थ निःसन्तान विधवा द्वारा पुत्र प्राप्ति हेतु अपने देवर के साथ संबंध बनाने के संदर्भ में किया जाता था।
18) अग्निष्टोम को सोम यज्ञ माना जाता था।
19) वैदिक देवता पूजन का रथ बफरे द्वारा खीचे जाने का उल्लेख मिलता है।
20) मैत्रेयनाथ में विज्ञानवाद योगाचार सम्प्रदाय की स्थापना की थी।
21) वैदिक साहित्य में बाराह को प्रजाप्रति के रूप में वर्णित किया जाता था।
22) ऋग्वैदिक समाज में गोप शब्द का प्रयोग राजा के लिए किया जाता था।
23) भगवान विष्णु का तमिल नाम तिरूमल है।
24) मनु की विधि व्यवस्था में चोरी के अपराध के लिए ब्राम्हण को सर्वाधिक दंड दिया जाता था।
25) वैदिक युगीन संस्कृति में सामान्य पारिस्थितियों में स्त्रीधन का उततराधिकार में प्रथम अधिकार पुत्री को प्राप्त था।
26) अविवाहित लडकी के पुत्र के लिए स्मृति साहित्य में कानीन शब्द प्रयुक्त हुआ है।
27) मिटटानी संस्कृति की धार्मिक आस्था मंे इन्द्र, वरूण, मित्र, नासत्य देवतागण विद्यमान थे।
28) अनुलोम विवाह का अर्थ है, उच्च वर्ग पुरूष का निम्न वर्ण नारी के साथ विवाह।
29) प्रतिलोम विवाह का अर्थ है, उच्च वर्ण की नारी निम्न वर्ण का पुरूष हो।
30) वैदिक कालीन राज सेवक कार्य
संग्रहीत कोषाध्यक्ष
भागदुत कर संग्रहकर्ता
क्षता/छती पांसे के खेल में राजा का सहायक
अक्षवाप प्रतिहारी/राजप्रसाद महल का रक्षक
31) धर्मषास्त्रों में भूमराजस्व की दर 1/6 थी।
32) बाह्मण काल का समय 800 ई0पू0 से 600 ई0पू0 माना जाता है।
33) उपवेद संबंधित वेद
आर्युवेद ऋग्वेद
धनुर्वेद यर्जुवेद
गन्धर्ववेद सामवेद
षिल्पवेद/अर्थषास्त्र अथर्ववेद
34) ऋग्वेद के दूसरे से सातवे मण्डल तक को वंष मंडल/गोत्र मंडल कहा जाता है।

वैदिक संस्कृति:- ऋग्वैदिक आर्य प्रकृति की पूजा करते थे।

  1.  वर्ण व्यवस्था का सर्व प्रथम विवरण ऋग्वेद के दसवे मंडल में उल्लिखित है।
  2.  उपनिषदों का मुख्य प्रतिपाद्या दार्षनिक विवेचन रहा है।
  3.  बाल बंगाधर तिलक आर्यो का मूल स्थान आर्कटिक क्षेत्र के मानते थे।
  4.  वेद का शाब्दिक अर्थ ज्ञान है।
  5.  आर्य अनार्य युद्ध का वर्णन वेदों में मिलता है।
  6.  ऋग्वेद में सूक्तियों की संख्या 1028 है।
  7.  पूर्व वैदिक काल में राजा पर संभा और समिति का नियत्रण होता था।
  8.  उत्तर वैदिक काल में समाज का विभाजन वर्ण व्यवस्था के आधार पर था।
  9.  उत्तर वैदिक काल में धार्मिक क्रियाओं में कर्मकाण्ठ मुख्य था।
  10.  आर्यो का मुख्य निवास एषिया माइनर को माना जाता है।
  11.  नगरीय जीवन वैदिक सभ्यता की विषेषता नही थी।
  12.  मैक्स मूलन नामक विद्वान वेदों के अध्ययन के लिए प्रसिद्ध है।
  13.  महाभाण्य की रचना पंतजलि ने की थी।
  14.  ऋग्वेद सभ्यता में शहरी जीवन का पतन हुआ।
  15.  उत्तर वैदिक युग में पैतृत परिवार होत थे।
  16.  वैदिक युग में मना का अर्थ धन होता था।
  17.  सिंधु घाटी तथा वैदिक दोनो सभ्यताओं मंे मूर्तिपूजा का प्रचलन नही था।
  18.  भाग एवं बलि राजस्व के साथन थे।
  19.  पाषिनी एक व्याकरण विद्वान थे इन्होनें अष्टाध्यायी की रचना की थी।
  20.  वैदिक समाज में प्रकृति पूजा वर्ण व्यवस्था पैतृक परिवारों का अस्तित्व था
  21.  ऋग्वेद में वर्णित धर्म का आधार प्रकृति पूजा था।
  22.  प्राचीन साहित्यों मंे 8 प्रकार के विवाहों का वर्णन हैं।
  23.  एषिया माइनर में बोगजकोई नामक स्थान से 1400 बी सी एक अभिलेख पाया गया था जिसमें वैदिक देवताओं का वर्णन है।
  24.  विश्ववारा दोषा अपाला आदि विदूषी महिलाये वैदिकमनों की रचयिता मानी जाती है।
  25.  प्रतिद्ध गायत्री मंत्र ऋग्वेद में है।
  26.  वैदिक काल में शासन का सामान्य स्वरूप राजतंत्र था।
  27.  वर्ण व्यवस्था की उत्पत्ति का संकेत सर्वप्रथम ऋग्वेद में मिलता है।
  28.  16 संस्कारों का वर्णन गृह सूत्र के मूल पाठ में मिलता है।
  29.  पर्शियन भाषा इण्डो आर्यन भाषा से संबंध रखती है।
  30.  सत्यमेव जयते उक्ति सर्वप्रथम मुण्डकोपनिषद में व्यक्त की गई।
  31.  अद्वैत दर्षन का प्रतिपादन उपनिषदों में मिलता है।
  32.  वैदिक काल में राजा को स्वेच्छा से दिया जाने वाला उपहार बलि था।
  33.  वैदिक भारत में राजाओं में बहुविवाह प्रचलित था।
  34.  यर्जुवेद कर्मकण्डों से विषेष रूप से सम्बन्धित है।
  35.  ऋग्वेद संहिता के मंत्रो का एक चैथाई दन्द्रदेव को सर्मपित है।
  36.  ऋग्वेद में वर्णित सबसे सामान्य अपराध पषुओं की चोरी था।
  37. आत्मा के आवागमन की परिकल्पना सर्वप्रथम ऋग्वेद में मिलती है।
  38.  बोगाजकोई अभिलेख में इन्द्र, वरूण, नासत्य और मित्र देवताओं का विषेष उल्लेख है।
  39.  अथर्ववेद को ब्रम्हवेद कहा गया है।
  40.  दषराज्ञ युद्ध परूपणी नदी के तट पर लडा गया।
  41.  भारतीय जाति व्यवस्था अपने श्रेष्ट क्लासिकल स्वरूप में कार्यो के विभाजन पर आधारित है।
  42.  वेदांगो के कुल संख्या छैः है।
  43.  समवेद गायन योग्य मंत्रो का ग्रन्थ है।
  44.  सुदास के विरूद्ध दस राजाओं का युद्ध विष्वामित्र के नेतृत्व में लडा गया।
  45.  ऋग्वेद का सम्र्पूण 9वां मंडल सोम देवता को समर्पित है।
  46.  पूर्व वैदिककाल से उततरवैदिक काल में राजस्व गठन का प्रमुख परिवर्तन यह हुआ कि राज्य के संगठन का आधार कुल न रहकर अपितु भूमि विस्तार हो गया।
  47.  राजा सुदास ऋिसू वंष से सम्बन्धित था।
  48.  सर्वप्रथम परीक्षित का उल्लेख अथर्ववेद में हुआ।
  49.  पुरोहितों में ब्रहमा का कार्य यज्ञ के सम्पादन का निरीक्षण करना था।
  50.  प्रारम्भिक वैदिक कालीन आर्यो का मुख्य व्यवसाय पशुपालन था।
  51.  सबसे प्राचीन जानी जाने वाले स्मृति मनुस्मृति है।
  52.  ऋग्वेद सभ्यता के य़ज्ञवाद की आलोचना उपनिषदों के ऋषियों ने की।
  53.  श्रुति वैदिक युगीन इतिहास का प्रधान स्त्रोत है।
  54.  वैदिक युग में राजा के बाद सबसे महत्तवपूर्ण अधिकारी सेनानी था।
  55.  संत विज्ञानेष्वर ने मिनाक्षष की रचना की।
  56.  प्रारम्भिक स्मृतियों के अनुसार ब्राम्हण को शुद्र द्वारा दी गयी भिक्षा नही लेनी चाहिये।
  57.  निष्फ सबसे प्राचीन स्वर्ण सिक्का था।
  58.  पूर्व वैदिक काल में सभी समिति एवं विद्भ में प्रजातांत्रिक मामलों पर विचार विमर्ष नही किया जाता था।
  59.  राजसूय यज्ञ राजा के राज्यभिषेक से सम्बन्धित है।
  60.  वेदत्रयी में सामवेद यर्जुवेद एवं ़ऋग्वेद सम्मिलित है।

CGPSC PRELIMS EXAM 2019

  • 150+ Hours VIDEO
  • 24*7 Doubt Clearance
  • 24 Months Validity
  • 32 GB PENDRIVE

BPSC PRELIMS EXAM 2019

  • 150+ Hours VIDEO
  • 24*7 Doubt Clearance
  • 24 Months Validity
  • 32 GB PENDRIVE

MPPSC PRELIMS EXAM 2019

  • 150+ Hours VIDEO
  • 24*7 Doubt Clearance
  • 24 Months Validity
  • 32 GB PENDRIVE

sindhu ghati -Indian History-Visualkart

Sindhu Ghaati(INDIAN HISTORY)Cgpsc/Bpsc/Mppsc/Uppsc-2019

Table of Contents Sindhu Ghati Sabhyata(INDIAN HISTORY) Cgpsc/Bpsc/Mppsc/Uppsc-2019सिंधु घाटी सभ्यता :- हडप्पा सभ्यता:-सिन्धु सभ्यता की मानवप्रजातियावैदिक संस्कृति:- ऋग्वैदिक आर्य प्रकृति की पूजा करते थे।CGPSC PRELIMS EXAM

Read More »
Close Menu
Send message via your Messenger App